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ओवरथिंकिंग कैसे रोकें: रात को नींद न आने और दिमाग में चलने वाले नेगेटिव विचारों को शांत करने के 7 तरीके

Disclaimer: Yeh article personal anubhav aur samajik jagrukta par aadharit hai. Yeh kisi bhi prakar ki medical salah, treatment ya diagnosis nahi hai. Agar aapko ya kisi ko madad chahiye, toh kripya qualified professional se sampark karein.
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रात के 3 बजे और अनियंत्रित दिमाग: क्या आप भी इस दर्द से गुजर रहे हैं?

क्या आपके साथ भी अक्सर ऐसा होता है कि आप दिन भर की कड़ी मेहनत और थकान के बाद रात को बिस्तर पर लेटते हैं? आपका शरीर पूरी तरह से थक चुका होता है और आराम मांग रहा होता है। आप अपनी आंखें बंद करते हैं ताकि एक सुकून भरी नींद ले सकें, लेकिन तभी अचानक आपका दिमाग एक अनियंत्रित बुलेट ट्रेन की तरह दौड़ने लगता है। और यह ट्रेन किसी अच्छी दिशा में नहीं, बल्कि सीधे डर, चिंता और नेगेटिव ख्यालों की तरफ भागती है।

अचानक आपको याद आने लगता है कि "मैंने 5 साल पहले उस इंसान को वह बात क्यों कही थी?", "अगर मेरी नौकरी चली गई या बिजनेस डूब गया तो क्या होगा?", "अगर मुझे कोई गंभीर बीमारी हो गई तो मेरे परिवार का क्या होगा?", "उसने आज मुझसे उस टोन में बात क्यों की, क्या वह मुझसे नाराज है?" या फिर "क्या मैं जिंदगी में कभी सफल हो पाऊंगा या हमेशा ऐसे ही संघर्ष करता रहूंगा?" ये सवाल आपके दिमाग में एक कैसेट की तरह लूप (Loop) में बजने लगते हैं। आप करवटें बदलते रहते हैं, घड़ी की सुइयां आगे बढ़ती रहती हैं, रात के 2 बज जाते हैं, फिर 3 बज जाते हैं, लेकिन नींद आपकी आंखों से कोसों दूर भाग जाती है।

अगर यह खौफनाक और थका देने वाला मंजर आपकी भी हर रात की कहानी बन चुका है, तो एक गहरी सांस लीजिए और खुद को तसल्ली दीजिए। आप पागल नहीं हो रहे हैं और आप इस दुनिया में अकेले नहीं हैं जो इस मानसिक टॉर्चर से गुजर रहे हैं। आज के इस तेज-तर्रार और तनाव से भरे युग में, हर तीसरा युवा गूगल पर यही सर्च कर रहा है कि "ओवरथिंकिंग कैसे रोकें" (How to stop overthinking) या "रात को नींद न आने का इलाज क्या है"। यह आर्टिकल आपको कोई ज्ञान देने के लिए नहीं लिखा गया है, बल्कि हम गहराई से और वैज्ञानिक नजरिए से समझेंगे कि हमारा अपना ही दिमाग हमारा सबसे बड़ा दुश्मन क्यों बन जाता है, और उन विचारों के तूफान को कैसे रोका जाए।

एक कड़वी सच्चाई: ओवरथिंकिंग (Overthinking) का मतलब समस्याओं को सुलझाना (Problem Solving) नहीं है। यह सिर्फ उन समस्याओं को जन्म देना है जो असलियत में कभी थीं ही नहीं, और शायद भविष्य में भी कभी नहीं होंगी।

ओवरथिंकिंग (Overthinking) आखिर है क्या? (Planning vs Overthinking)

कई लोग सोचते हैं कि ज्यादा सोचना अच्छी बात है क्योंकि इससे हम भविष्य की प्लानिंग करते हैं। लेकिन प्लानिंग और ओवरथिंकिंग के बीच एक बहुत बड़ा और बारीक अंतर होता है। जब आप 'प्लानिंग' करते हैं, तो आप किसी समस्या का समाधान खोजते हैं, एक निर्णय लेते हैं और फिर उस पर काम करना शुरू कर देते हैं (Action)। इससे आपका दिमाग शांत हो जाता है।

लेकिन जब आप 'ओवरथिंकिंग' करते हैं, तो आप कोई फैसला नहीं लेते। आप सिर्फ एक ही विचार को, एक ही डर को, या एक ही बीती हुई घटना को बार-बार अपने दिमाग में दोहराते रहते हैं। आप उस स्थिति के 100 अलग-अलग 'Worst Case Scenarios' (सबसे बुरे परिणाम) बनाते हैं। यह बिल्कुल ऐसा है जैसे आप किसी कार को न्यूट्रल गियर में डालकर पूरी ताकत से एक्सीलेटर (Accelerator) दबा रहे हों। इंजन पूरी ताकत से दहाड़ेगा, पेट्रोल भी जलेगा, लेकिन आपकी कार एक इंच भी आगे नहीं बढ़ेगी। ओवरथिंकिंग में आपके दिमाग की ऊर्जा (Energy) पूरी तरह से खत्म हो जाती है, लेकिन नतीजा शून्य निकलता है।

रात के सन्नाटे में ही ओवरथिंकिंग का सबसे बड़ा हमला क्यों होता है?

यह सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला सवाल है कि दिन के समय तो हम ठीक रहते हैं, लेकिन रात को बिस्तर पर लेटते ही ये नेगेटिव विचार अचानक से हमला क्यों कर देते हैं? इसके पीछे कोई जादू नहीं, बल्कि विशुद्ध मनोविज्ञान (Psychology) और हमारे दिमाग की बनावट है।

दिन के समय आपका दिमाग 'डिस्ट्रैक्शन' (Distraction) यानी भटकाव से भरा होता है। आप ऑफिस के काम में लगे होते हैं, दोस्तों से बात कर रहे होते हैं, ट्रैफिक में गाड़ी चला रहे होते हैं, या फिर अपने मोबाइल पर रील स्क्रॉल कर रहे होते हैं। इन सब कामों के बीच आपके दिमाग को अपनी असली भावनाओं और डरों के बारे में सोचने का समय ही नहीं मिलता। वह उन सभी दबे हुए विचारों (Suppressed thoughts) को एक बैकग्राउंड फोल्डर में डालता रहता है।

लेकिन रात को जब आप बिस्तर पर लेटते हैं, तो कमरे में सन्नाटा होता है। कोई शोर नहीं, कोई काम नहीं, और आपके हाथ में मोबाइल भी नहीं होता। यही वह समय होता है जब आपके दिमाग को पहली बार शांति मिलती है, और वह दिन भर के, या सालों पुराने दबे हुए उस 'बैकग्राउंड फोल्डर' को खोलकर प्रोसेस (Process) करना शुरू कर देता है। क्योंकि दिमाग के पास उस समय फोकस करने के लिए कोई बाहरी काम नहीं होता, इसलिए वह पूरी ताकत से आपके अंदर के डरों को प्रोजेक्ट करने लगता है।

दिमाग का 'सर्वाइवल मोड' (Survival Mode) और नेगेटिविटी

हमारे दिमाग का मुख्य काम हमें खुश रखना नहीं है, बल्कि हमें 'जिंदा' रखना (Survival) है। हजारों साल पहले जब इंसान जंगलों में रहता था, तो उसका दिमाग हमेशा खतरों (जैसे जंगली जानवर) को ढूंढता था ताकि वह बच सके। आज हमारे जीवन में जंगली जानवर तो नहीं हैं, लेकिन हमारा दिमाग अभी भी उसी 'खतरे' वाले मोड में काम करता है। यही कारण है कि आपका दिमाग दिन भर में हुई 10 अच्छी बातों को भूल जाएगा, लेकिन किसी एक इंसान की कही हुई 1 बुरी बात को रात भर पकड़ कर बैठा रहेगा। दिमाग को लगता है कि उस नेगेटिव बात पर विचार करके वह आपको भविष्य के किसी खतरे से बचा रहा है, जबकि असल में वह आपको डिप्रेशन की तरफ धकेल रहा होता है।

ओवरथिंकिंग कैसे आपकी जिंदगी और शरीर को खोखला कर रही है?

अगर आपको लगता है कि रात-रात भर जागकर ख्याली पुलाव पकाना या पुरानी बातों का पछतावा करना सिर्फ दिमाग तक सीमित है, तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी में हैं। यह लगातार चलने वाली ओवरथिंकिंग आपके शरीर और आपकी पूरी जिंदगी को दीमक की तरह खा रही है। इसके मुख्य नुकसान इस प्रकार हैं:

1. क्रोनिक इन्सोम्निया (Chronic Insomnia) और एनर्जी का खत्म होना

जब दिमाग में लगातार विचार चलते हैं, तो शरीर में कॉर्टिसोल (Cortisol) और एड्रेनालाईन (Adrenaline) नाम के स्ट्रेस हार्मोन रिलीज होते हैं। ये हार्मोन शरीर को 'लड़ो या भागो' (Fight or Flight) स्थिति में ले आते हैं, जिससे आपकी हार्ट रेट बढ़ जाती है। ऐसे अलर्ट (Alert) शरीर में नींद का आना नामुमकिन हो जाता है। लगातार कई हफ्तों या महीनों तक ठीक से न सो पाने के कारण इंसान को भयंकर इन्सोम्निया (Insomnia) हो जाता है। अगले दिन आपके शरीर में कोई एनर्जी नहीं होती, आंखें जलती हैं और आप किसी भी काम पर फोकस नहीं कर पाते।

2. रिश्तों में शक और दरार (Creating Fake Problems)

ओवरथिंकिंग करने वाला इंसान अपने ही दिमाग में झूठी कहानियां बनाने में माहिर हो जाता है। अगर किसी दोस्त या पार्टनर ने उनके मैसेज का रिप्लाई 2 घंटे लेट दिया, तो ओवरथिंकर यह नहीं सोचेगा कि वह इंसान व्यस्त हो सकता है। उसका दिमाग सोचेगा— "वह मुझे इग्नोर कर रहा है", "शायद मैंने कुछ गलत कह दिया", "शायद अब वह मुझसे प्यार नहीं करता।" इन ख्याली और झूठे शक के आधार पर आप सामने वाले से लड़ बैठते हैं, और एक बहुत अच्छा रिश्ता सिर्फ आपकी ओवरथिंकिंग की बलि चढ़ जाता है।

3. डिसीजन फटीग (Decision Fatigue) और मौकों का हाथ से निकलना

ज्यादा सोचने वाले लोग कभी कोई फैसला नहीं ले पाते। अगर उन्हें कोई नया बिजनेस शुरू करना है, नौकरी बदलनी है, या कोई छोटा सा सामान भी खरीदना है, तो वे उसके फायदों और नुकसानों के बारे में इतना ज्यादा रिसर्च और एनालिसिस (Analysis Paralysis) करते हैं कि उनका दिमाग सुन्न (Blank) हो जाता है। फैसला न ले पाने के इसी डर के कारण जिंदगी के सबसे बेहतरीन मौके उनके हाथ से हमेशा के लिए निकल जाते हैं और वे जिंदगी भर वहीं के वहीं फंसे रह जाते हैं।

4. गंभीर शारीरिक बीमारियां (Physical Breakdown)

यह बात मेडिकली प्रूवन (Medically Proven) है कि जो दिमाग शांत नहीं रहता, वह शरीर को बीमार कर देता है। लगातार ओवरथिंकिंग करने से आपके शरीर की इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) गिर जाती है। आपको अक्सर भयंकर सिरदर्द (Migraine), ब्लड प्रेशर का बढ़ना, पेट खराब रहना (IBS), बालों का तेजी से झड़ना, और सीने में भारीपन जैसी समस्याएं होने लगती हैं। यह इस बात का संकेत है कि आपका शरीर अब उस मानसिक तनाव का बोझ और नहीं उठा पा रहा है।

ओवरथिंकिंग कैसे रोकें: दिमाग को तुरंत शांत करने के 7 प्रक्टिकल और अचूक तरीके

अब जब आप समझ चुके हैं कि यह लगातार सोचने की बीमारी (Overthinking) आपके शरीर और दिमाग के साथ क्या खेल खेल रही है, तो सवाल यह उठता है कि इस दौड़ती हुई बुलेट ट्रेन पर ब्रेक कैसे लगाएं? इंटरनेट पर लोग कहते हैं "पॉजिटिव सोचो" या "ज्यादा मत सोचो", लेकिन यह कहना जितना आसान है, करना उतना ही मुश्किल। जब दिमाग में तूफान चल रहा हो, तो कोई भी मोटिवेशनल बात काम नहीं आती।

हमें इस तूफान को रोकने के लिए कुछ ठोस, वैज्ञानिक और प्रक्टिकल तरीकों (Practical techniques) की जरूरत है। यहां 7 ऐसे तरीके दिए गए हैं जिन्हें मनोविज्ञान (Psychology) में सबसे ज्यादा असरदार माना गया है। आपको इन सभी को एक साथ नहीं करना है, बस इनमें से जो तरीका आपको सबसे सही लगे, उसे आज रात से ही अपनी रूटीन में शामिल कर लें।

1. 'ब्रेन डंप' तकनीक (Brain Dump Technique) - विचारों को कागज पर उतारें

आपका दिमाग आइडिया सोचने और फैसले लेने के लिए बना है, किसी हार्ड डिस्क की तरह हजारों विचारों को स्टोर (Store) करके रखने के लिए नहीं। जब आपके दिमाग में एक साथ 50 बातें चल रही होती हैं, तो वह हैंग (Hang) होने लगता है। इस समस्या का सबसे बेहतरीन इलाज है 'ब्रेन डंप'।

रात को सोने से ठीक 15 मिनट पहले एक डायरी और पेन लें। आपके दिमाग में जो भी कचरा, डर, चिंता या कल के काम की लिस्ट चल रही है, उसे बिना सोचे-समझे उस कागज पर उतार दें (Brain dump)। आपको कोई अच्छी राइटिंग नहीं बनानी है, बस लिखते जाना है। जब आप अपनी चिंताओं को कागज पर लिख देते हैं, तो आपके दिमाग को एक सिग्नल मिलता है कि "अब यह जानकारी सुरक्षित जगह पर सेव हो गई है, अब मुझे इसे याद रखने की जरूरत नहीं है।" इससे आपके दिमाग की 'रैम' (RAM) खाली हो जाती है और आपको तुरंत एक हल्की और सुकून भरी नींद आने लगती है।

2. 5-4-3-2-1 ग्राउंडिंग रूल (Grounding Technique) - वर्तमान में वापस आना

ओवरथिंकिंग हमेशा या तो 'बीते हुए कल' (Past) के पछतावे के बारे में होती है, या फिर 'आने वाले कल' (Future) के डर के बारे में। आप कभी भी 'आज' और 'अभी' (Present moment) में ओवरथिंक नहीं कर सकते। इसलिए जब भी रात को या दिन में अचानक घबराहट (Anxiety) होने लगे, तो अपने दिमाग को भविष्य से खींचकर वर्तमान में लाने के लिए इस 5-4-3-2-1 रूल का इस्तेमाल करें:

  • 5 चीजें: अपने आस-पास की कोई भी 5 चीजें देखें (जैसे पंखा, खिड़की, किताब)।
  • 4 चीजें: किन्हीं 4 चीजों को छुएं और महसूस करें (जैसे बेडशीट, अपना हाथ, या ठंडी दीवार)।
  • 3 आवाजें: आंखें बंद करें और 3 अलग-अलग आवाजें सुनें (जैसे घड़ी की टिक-टिक या बाहर ट्रैफिक की आवाज)।
  • 2 चीजें: कोई भी 2 चीजों की महक (Smell) लें।
  • 1 चीज: कोई भी 1 चीज का स्वाद लें (Taste) या सिर्फ एक घूंट पानी पी लें।

यह एक्सरसाइज आपके दिमाग का फोकस डरावने ख्यालों से हटाकर आपके फिजिकल सेंसेस (Physical Senses) पर ले आती है और आपका पैनिक अटैक तुरंत रुक जाता है।

3. 'सर्कल ऑफ कंट्रोल' (Circle of Control) - क्या यह मेरे हाथ में है?

हम उन चीजों के बारे में सबसे ज्यादा ओवरथिंक करते हैं जिन पर हमारा कोई बस नहीं चलता। जैसे— "बॉस मेरे बारे में क्या सोचेगा?", "कल बारिश हो गई तो मेरी ट्रिप का क्या होगा?", या "अर्थव्यवस्था (Economy) गिर गई तो मेरी जॉब का क्या होगा?"

अगली बार जब कोई विचार आपको परेशान करे, तो खुद से एक सीधा सवाल पूछें: "क्या इस समस्या का समाधान मेरे कंट्रोल (Control) में है?"

अगर जवाब 'हां' है— तो उस पर ओवरथिंक करने के बजाय एक कागज लें, उसका एक्शन प्लान बनाएं और काम शुरू करें।

अगर जवाब 'ना' है (जैसे लोगों की सोच, मौसम, या पास्ट की गलतियां)— तो उस विचार को उसी वक्त एक मानसिक कचरे के डिब्बे (Trash bin) में फेंक दें। जिस चीज को आप बदल नहीं सकते, उस पर अपनी एनर्जी बर्बाद करना बेवकूफी है। अपना पूरा फोकस सिर्फ अपनी मेहनत, अपने शब्दों और अपने बर्ताव पर रखें, जो 100% आपके कंट्रोल में हैं।

4. दिन में अपना 'चिंता का समय' (Worry Time) तय करें

यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन यह एक बहुत ही पावरफुल साइकोलॉजिकल हैक (Hack) है। आपको अपने दिमाग को चिंता करने से पूरी तरह रोकना नहीं है, बल्कि उसे 'शेड्यूल' (Schedule) करना है। दिन में कोई भी 15 मिनट का समय तय कर लें (जैसे दोपहर 4:00 से 4:15 बजे तक), जिसे आप अपना 'Worry Time' कहेंगे।

अगर रात को 11 बजे या सुबह काम के बीच आपको कोई नेगेटिव ख्याल आता है, तो अपने दिमाग से कहें— "यह एक अच्छी समस्या है, लेकिन मैं अभी इस पर विचार नहीं करूंगा। मैं इसके बारे में शाम को 4 बजे पूरे 15 मिनट तक जी भरकर सोचूंगा।" जब आपका वह 4 बजे वाला समय आए, तो अलार्म लगाएं और जमकर उस समस्या पर ओवरथिंक करें। आप हैरान रह जाएंगे कि जब आप जानबूझकर चिंता करने बैठते हैं, तो 5 मिनट बाद ही आपको बोरियत होने लगेगी और आपका दिमाग शांत हो जाएगा। इस तरीके से रात की नींद खराब होना बंद हो जाती है।

ओवरथिंकिंग का नियम: जिस विचार पर आप जितना ज्यादा गुस्सा करेंगे या उसे भगाने की कोशिश करेंगे, वह उतनी ही ज्यादा ताकत से वापस आएगा। विचारों से लड़ें नहीं, उन्हें सिर्फ एक 'क्लाउड' (बादल) की तरह आते और जाते हुए देखें।

5. 4-7-8 ब्रीदिंग टेक्निक (4-7-8 Breathing for Quick Sleep)

जब आप बहुत ज्यादा सोचते हैं, तो आपकी सांसें छोटी और तेज हो जाती हैं। इससे दिमाग को लगता है कि कोई खतरा है। इस खतरे के अलार्म को बंद करने के लिए डॉ. एंड्रयू वेइल (Dr. Andrew Weil) की मशहूर '4-7-8 ब्रीदिंग' तकनीक का इस्तेमाल करें। यह आपके शरीर के 'पैरासिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम' (Parasympathetic Nervous System) को एक्टिवेट करती है, जो शरीर को रिलैक्स (Relax) होने का सीधा कमांड देता है।

कैसे करें:

  • अपने मुंह से पूरी सांस बाहर निकाल दें।
  • अब अपनी नाक से शांति से सांस अंदर लें और मन में 4 सेकंड तक गिनें।
  • अपनी सांस को रोक कर रखें (Hold) और 7 सेकंड तक गिनें।
  • अंत में, अपने मुंह से सीटी जैसी आवाज निकालते हुए पूरी सांस बाहर छोड़ें और 8 सेकंड तक गिनें।

इस साइकिल को सिर्फ 4 बार रिपीट करें। यह आपके दिमाग को इतना शांत कर देगा जैसे आपने कोई नींद की गोली (Sleeping pill) खा ली हो।

6. 'एक्शन' से 'परफेक्शन' की बीमारी को हराएं (Action Cures Fear)

ज्यादातर ओवरथिंकिंग इस डर से पैदा होती है कि "मुझसे कोई गलती न हो जाए" या "सब कुछ बिल्कुल परफेक्ट (Perfect) होना चाहिए।" अगर आप एक ईमेल भेजने के लिए या किसी को कॉल करने के लिए 1 घंटे तक सिर्फ सोचते रहते हैं, तो आप 'परफेक्शनिज़्म' (Perfectionism) के शिकार हैं।

इस बीमारी का सिर्फ एक ही इलाज है— एक्शन (Action)। 'Analysis Paralysis' से बचने के लिए '5 सेकंड रूल' (5 Second Rule) अपनाएं। जब भी आपको कोई काम करना हो और आपका दिमाग बहाने या डर पैदा करने लगे, तो 5-4-3-2-1 उल्टी गिनती गिनें और उस काम को तुरंत कर डालें। खराब करें, गलतियों के साथ करें, लेकिन कर दें। जब आप कोई एक्शन लेते हैं, तो दिमाग का वह 'डर वाला हिस्सा' तुरंत बंद हो जाता है और आपको एक अजीब सी शांति मिलती है।

7. रात का डिजिटल बाउंड्री (Digital Boundaries Before Bed)

रात को 11 बजे बिस्तर पर लेटकर क्राइम न्यूज पढ़ना, मर्डर मिस्ट्री की वेब सीरीज देखना, या सोशल मीडिया पर दूसरों की चमकती हुई जिंदगी देखकर अपनी किस्मत को कोसना— ये सभी काम आपके दिमाग में नेगेटिव विचारों का बारूद भरते हैं।

अगर आपको सच में अपनी ओवरथिंकिंग को जड़ से खत्म करना है, तो सोने से कम से कम 1 घंटा पहले अपने घर में एक सख्त 'डिजिटल कर्फ्यू' लगा दें। फोन के डेटा को बंद करें और उसे दूसरे कमरे की टेबल पर छोड़ आएं। उस आखिरी 1 घंटे में कोई बहुत ही बोरिंग और हल्की-फुल्की किताब पढ़ें, अपने परिवार से 10 मिनट बात करें, या सिर्फ शांत बैठे रहें। जब आपके दिमाग को बाहर से कोई नया और भड़काने वाला डेटा (Data) नहीं मिलेगा, तो वह अपने आप शटडाउन (Shutdown) मोड में चला जाएगा और आपको एक बच्चे जैसी गहरी नींद आएगी।

अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण सवाल (FAQ)

1. ओवरथिंकिंग (Overthinking) और एंग्जायटी (Anxiety) या डिप्रेशन में क्या अंतर है?

ओवरथिंकिंग एक 'मानसिक आदत' है जिसमें आप एक ही विचार या समस्या को बार-बार अपने दिमाग में दोहराते रहते हैं। वहीं, एंग्जायटी (Anxiety) उस ओवरथिंकिंग का 'शारीरिक असर' है (जैसे— दिल की धड़कन तेज होना, पसीना आना, या सांस फूलना)। अगर इस ओवरथिंकिंग और एंग्जायटी को लंबे समय तक न रोका जाए, और इंसान को लगने लगे कि अब कुछ भी ठीक नहीं हो सकता, तो यह लाचारी की भावना डिप्रेशन (Depression) में बदल जाती है।

2. क्या ओवरथिंकिंग की आदत को हमेशा के लिए 100% खत्म किया जा सकता है?

कड़वा सच यह है कि इसका जवाब 'नहीं' है। जिस तरह आप अपने दिल को धड़कने से नहीं रोक सकते, उसी तरह आप अपने दिमाग को सोचने से नहीं रोक सकते। हमारा लक्ष्य दिमाग को 'शून्य' (Zero thoughts) करना नहीं है, बल्कि विचारों को 'मैनेज' (Manage) करना है। आपको बस यह सीखना है कि कौन सा विचार आपके काम का है जिस पर एक्शन लेना है, और कौन सा विचार सिर्फ एक कचरा है जिसे इग्नोर करना है।

3. रात को सोते समय मुझे मौत, एक्सीडेंट या बहुत डरावने ख्याल क्यों आते हैं?

मनोविज्ञान की भाषा में इन्हें 'इन्ट्रूसिव थॉट्स' (Intrusive Thoughts) कहा जाता है। जब आप रात को बहुत ज्यादा थके हुए होते हैं, तो आपके दिमाग का लॉजिकल फिल्टर (Logical filter) कमजोर पड़ जाता है। आपका 'सर्वाइवल ब्रेन' आपको किसी अनदेखे खतरे से बचाने के लिए सबसे डरावने 'Worst Case Scenarios' (जैसे किसी अपने को खोना) दिखाने लगता है। याद रखें, ये सिर्फ विचार हैं, कोई भविष्यवाणी या हकीकत नहीं। इन्हें सच मानना बंद कर दें।

4. क्या सच में मेडिटेशन (ध्यान) करने से दिमाग शांत होता है और ओवरथिंकिंग रुकती है?

जी हां, मेडिटेशन आपके दिमाग के लिए बिल्कुल वैसा ही है जैसे शरीर के लिए जिम जाना। जब आप ध्यान करते हैं, तो आप अपने विचारों से लड़ते नहीं हैं, बल्कि उन्हें एक 'दर्शक' (Observer) की तरह चुपचाप आते-जाते देखते हैं। लगातार 21 दिन तक सिर्फ 10 मिनट अपनी सांसों पर फोकस करने (Mindfulness) से आपके दिमाग का वह हिस्सा शांत होने लगता है जो डर पैदा करता है।

5. अगर मेरा दोस्त या पार्टनर बहुत ज्यादा सोचता है, तो मैं उसे कैसे शांत करूँ?

सबसे बड़ी गलती लोग यह करते हैं कि वे ओवरथिंकर को कहते हैं— "अरे ज्यादा मत सोच, रिलैक्स कर।" यह बात उन्हें और ज्यादा गुस्सा दिलाती है। इसकी जगह उनकी भावनाओं को समझें (Validate करें)। उनसे कहें— "मैं समझ सकता हूँ कि तुम बहुत स्ट्रेस में हो, चलो मिलकर इसका हल निकालते हैं।" इसके अलावा उन्हें किसी फिजिकल एक्टिविटी (Physical activity) जैसे वॉक पर ले जाएं या किसी दूसरे विषय पर बात करके उनका ध्यान भटकाएं।

6. मुझे कब समझ जाना चाहिए कि मेरी ओवरथिंकिंग अब खतरे के निशान से ऊपर जा चुकी है और मुझे डॉक्टर की जरूरत है?

जब ओवरथिंकिंग आपकी रोजमर्रा की जिंदगी को पूरी तरह से बर्बाद करने लगे— जैसे आपको लगातार कई दिनों तक बिल्कुल नींद न आए, आपका वजन तेजी से कम होने लगे, आप ऑफिस का कोई काम न कर पाएं, आपको बार-बार पैनिक अटैक (Panic Attacks) आएं, या आपके मन में खुद को नुकसान पहुंचाने (Self-harm) के ख्याल आने लगें, तो यह एक रेड फ्लैग (Red flag) है। ऐसे समय में किसी भी तरह की शर्मिंदगी महसूस किए बिना तुरंत किसी अच्छे साइकोलॉजिस्ट (Therapist) की मदद लें।

निष्कर्ष (Conclusion)

मशहूर दार्शनिक सेनेका (Seneca) ने एक बहुत ही कमाल की बात कही थी— "हम असलियत से ज्यादा अपनी कल्पनाओं (Imagination) में दुखी होते हैं।" आपकी 99% चिंताएं उन चीजों के बारे में हैं जो असल जिंदगी में कभी होने ही नहीं वाली हैं। अपने ही दिमाग को अपना जेलर (Jailer) मत बनने दीजिए। ओवरथिंकिंग सिर्फ एक मानसिक जाल है, और इस जाल को काटने का इकलौता हथियार 'एक्शन' (Action) है।

आज रात से ही बिस्तर पर जाने से पहले अपने फोन को दूसरे कमरे में रख दें, अपने सारे डरों को एक कागज पर 'ब्रेन डंप' करें, लंबी सांसें लें और वर्तमान (Present) में जीना शुरू करें। जो बीत गया उसे आप बदल नहीं सकते, और जो आने वाला है उसका कंट्रोल आपके हाथ में नहीं है। आपके पास सिर्फ 'आज' है, इसलिए इसे फालतू की चिंताओं में बर्बाद न करें और एक सुकून भरी नींद का आनंद लें।

विवेक भाई की एडवाइस:

दोस्तों, एक ब्लॉगर और डिजिटल क्रिएटर होने के नाते मैं इस 'ओवरथिंकिंग' की बीमारी को बहुत करीब से समझता हूँ। एक समय था जब मैं रात को 2 बजे तक अपनी वेबसाइट के एनालिटिक्स, गूगल रैंकिंग, एडसेंस की अर्निंग और भविष्य के ट्रैफिक के बारे में सोच-सोच कर पागल हो जाता था। दिमाग चलता रहता था कि "अगर गूगल का कोर अपडेट आ गया और मेरी साइट डाउन हो गई तो क्या होगा?" इस फालतू के डर ने मेरी रातों की नींद और दिन का सुकून दोनों छीन लिया था।

फिर मुझे एक कड़वी लेकिन सच्ची बात समझ आई— जो चीज मेरे कंट्रोल में ही नहीं है (जैसे गूगल का अल्गोरिदम या दुनिया की सोच), उस पर विचार करके मैं सिर्फ अपना शरीर गला रहा हूँ। मेरा काम सिर्फ अच्छी मेहनत करना है, रिजल्ट भगवान के हाथ में है। मेरी आप सभी को यही बड़े भाई वाली सलाह है कि रात को काम की बातों को ऑफिस के लैपटॉप या डायरी में ही छोड़ आएं, उन्हें अपने बेडरूम में साथ लेकर न आएं। जिंदगी बहुत छोटी और खूबसूरत है, इसे कल की काल्पनिक चिंताओं में बर्बाद मत कीजिए। अभी इसी वक्त एक लंबी सांस लीजिए, फोन की स्क्रीन ऑफ कीजिए, और बिना कुछ सोचे शांति से सो जाइए। कल की सुबह एक नई उम्मीद लेकर आएगी!
ओवरथिंकिंग कैसे रोकें: रात को नींद न आने और दिमाग में चलने वाले नेगेटिव विचारों को शांत करने के 7 तरीके

Vivek Hardaha - Recovery Writer
Vivek Hardaha
M.Sc (CS), MA Sociology
Alcohol Recovery Experience Since 2018
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