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शराब छोड़ने के बाद नींद नहीं आती? आजमाएं ये 3 तरीके

Disclaimer: Yeh article personal anubhav aur samajik jagrukta par aadharit hai. Yeh kisi bhi prakar ki medical salah, treatment ya diagnosis nahi hai. Agar aapko ya kisi ko madad chahiye, toh kripya qualified professional se sampark karein.
Alcohol Withdrawal Insomnia Tips

शराब छोड़ने के बाद अच्छी नींद लेने का सबसे आसान और आजमाएं हुए 3 तरीके

क्या आपने अभी-अभी शराब छोड़ी है और अब रातों की नींद हराम हो गई है? बिस्तर पर करवटें बदलते रहना, छत को घूरना और मन में यह ख्याल आना कि "यार, इससे अच्छा तो पी ही लेता, कम से कम नींद तो आती" — ये कहानी सिर्फ आपकी नहीं है। यह हर उस योद्धा की कहानी है जिसने शराब को 'ना' कहने की हिम्मत दिखाई है।

लेकिन रुकिए! डरिये मत। यह नींद का न आना कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह सबूत है कि आपका शरीर शराब के जहर से बाहर निकल रहा है। यह एक Good Sign है। आज इस आर्टिकल में हम कोई हवा-हवाई बात नहीं करेंगे। मैं आपको साइंस, लॉजिक और अपने पर्सनल अनुभव (Vivek Bhai Style) से वो 3 तरीके बताऊंगा जो 100% काम करते हैं। अगर आप इन तरीकों को समझ गए, तो दवा की गोली की जरूरत कभी नहीं पड़ेगी।

📑 इस आर्टिकल में क्या है (Table of Contents)

लत को समझो: क्या है यह बला? (Understanding Addiction)

सबसे पहले हमें अपने दुश्मन को पहचानना होगा। हम अक्सर सोचते हैं कि शराब पीना सिर्फ एक 'बुरी आदत' है। जी नहीं, यह आदत से बहुत बड़ी चीज है। लत (Addiction) का मतलब है आपके दिमाग की Re-wiring हो जाना।

हमारा दिमाग करोड़ों साल के इवोल्यूशन से बना है। इसका एक ही मकसद होता है — हमें जिंदा रखना और दर्द से बचाना। जब आप पहली बार शराब पीते हैं, तो दिमाग में Dopamine (खुशी का रसायन) रिलीज होता है। दिमाग को लगता है, "वाह! यह क्या चीज थी? इससे तो सारा स्ट्रेस गायब हो गया।" धीरे-धीरे दिमाग इस शॉर्टकट को सीख लेता है।

लत तब लगती है जब दिमाग यह मान लेता है कि "नॉर्मल" महसूस करने के लिए शराब जरूरी है। यह एक सर्वाइवल मैकेनिज्म (Survival Mechanism) बन जाता है, ठीक वैसे ही जैसे खाना और पानी। जब आप शराब छोड़ते हैं, तो दिमाग पैनिक मोड में चला जाता है। उसे लगता है कि उसके जीने का सहारा छिन गया है। यह जो बेचैनी और नींद न आना है, यह असल में आपका दिमाग है जो चीख-चीख कर अपनी पुरानी 'खुराक' मांग रहा है।

लेकिन अच्छी खबर यह है कि दिमाग 'प्लास्टिक' जैसा होता है (Neuroplasticity)। जैसे इसने शराब की आदत सीखी थी, वैसे ही यह इसे भूल भी सकता है। बस इसे थोड़ा वक्त और सही दिशा देने की जरूरत है। यह समझ लीजिए कि अभी आपका दिमाग एक जिद्दी बच्चे की तरह व्यवहार कर रहा है, और आपको एक समझदार माता-पिता की तरह उसे संभालना है।

शराब का दिमाग में असर: धोखा या सुकून?

बहुत से लोग कहते हैं, "भाई, मैं तो सोने के लिए पीता हूँ।" यह दुनिया का सबसे बड़ा झूठ है जो हम खुद से बोलते हैं। शराब आपको सुलाती नहीं है, यह आपको बेहोश (Sedate) करती है।

⚠️ विवेक भाई का फैक्ट: नींद और बेहोशी में जमीन-आसमान का अंतर है। नींद में शरीर और दिमाग रिपेयर होते हैं, जबकि शराब वाली बेहोशी में दिमाग का शटर बस गिर जाता है, रिपेयरिंग नहीं होती।

जब आप शराब पीते हैं, तो यह आपके दिमाग के उस हिस्से को सुन्न कर देती है जो सोचने-समझने का काम करता है (Prefrontal Cortex)। इसीलिए पीने के बाद हम इंग्लिश बोलने लगते हैं या निडर हो जाते हैं। लेकिन सबसे खतरनाक असर यह होता है कि शराब REM Sleep (Rapid Eye Movement) को खत्म कर देती है। REM स्लीप वह समय होता है जब हम सपने देखते हैं और हमारी यादें पक्की होती हैं।

यही कारण है कि शराबी इंसान 10 घंटे सोने के बाद भी थका हुआ उठता है। उसका शरीर बिस्तर पर था, लेकिन दिमाग पूरी रात एक टॉक्सिक कोमा में था। इसलिए, जब आप शराब छोड़ते हैं, तो शुरुआत में नींद नहीं आती क्योंकि अब दिमाग को "नेचुरल नींद" में जाने का रास्ता याद नहीं आ रहा है। वह रास्ता जो सालों पहले शराब के नशे में कहीं खो गया था।

नींद क्यों डिस्टर्ब होती है? (The Science of Sleep & Withdrawal)

अब थोड़ा साइंटिस्ट बनते हैं और समझते हैं कि आखिर छोड़ने के बाद नींद क्यों भाग जाती है। हमारे दिमाग में एक तराजू (Seesaw) होता है जिसमें दो केमिकल्स बैठे होते हैं:

Chemical Role (काम) शराब का असर
GABA दिमाग को शांत करना (Brake) शराब इसे नकली तरीके से बढ़ा देती है।
Glutamate दिमाग को एक्टिव रखना (Accelerator) शराब इसे दबा देती है।

सालों तक शराब पीने की वजह से आपका दिमाग GABA (Brakes) बनाना कम कर देता है और Glutamate (Accelerator) बहुत ज्यादा बनाने लगता है ताकि बैलेंस बना रहे।

धमाका तब होता है जब आप शराब छोड़ते हैं:

  • अचानक शराब (बाहरी GABA) बंद हो गई।
  • शरीर का अपना GABA सिस्टम कमजोर है।
  • लेकिन Glutamate (एक्साइटमेंट वाला केमिकल) अभी भी हाई गियर में है!

नतीजा? आप बिस्तर पर लेटे हैं, शरीर थका हुआ है, लेकिन दिमाग 200 की स्पीड पर दौड़ रहा है। विचार रुक नहीं रहे हैं, दिल की धड़कन तेज है। इसे Rebound Insomnia कहते हैं। यह आपकी गलती नहीं है, यह सिर्फ एक केमिकल असंतुलन है जो समय के साथ (7 से 21 दिन में) अपने आप ठीक हो जाएगा। बस इस तूफानी समय को निकालने के लिए हमें कुछ "हथियार" चाहिए।

तरीका 1: साइंस और लॉजिक वाली मूवी या सीरीज (Distraction Therapy)

यह मेरा सबसे फेवरेट तरीका है और मैंने खुद इसे अपनाया है। जब नींद नहीं आ रही हो, तो जबरदस्ती सोने की कोशिश मत करो। इससे स्ट्रेस और बढ़ेगा। इसके बजाय, अपने दिमाग को एक "Parallel Universe" (दूसरी दुनिया) में भेज दो।

सबसे पहले किसी एक बड़ी और लॉजिक साइंस वाली मूवी या सीरीज के फैन बन जाओ। मैं यहाँ 'सास-बहू' या रोने-धोने वाले सीरियल की बात नहीं कर रहा। मैं बात कर रहा हूँ ऐसी कहानियों की जो आपके दिमाग के तार हिला दें। जैसे Interstellar, Inception, Dark (Netflix), Breaking Bad, या Space Documentaries

यह काम कैसे करता है?
जब आप कोई जटिल (Complex) स्टोरी देखते हैं, तो आपका दिमाग उसे डिकोड करने में लग जाता है।

  • "अरे, यह टाइम ट्रेवल कैसे हुआ?"
  • "ब्लैक होल के अंदर क्या है?"
  • "अगले सीन में विलेन क्या करेगा?"

देखते-देखते आप उस कहानी में ऐसे घुस जाओगे कि दिमाग उसी में लगा रहेगा। 1 मूवी या 1 एपिसोड खत्म होगा, फिर दूसरा, फिर और...। आपका ध्यान शराब की तलब (Craving) से हटकर "क्यूरियसिटी" (Curiosity) पर शिफ्ट हो जाएगा। डोपामाइन जो शराब मांग रहा था, अब उसे कहानी के सस्पेंस से मजा आने लगेगा।

फिर एक पॉइंट आएगा जब दिमाग इतना थक जाएगा (Information Overload से) कि वह खुद कहेगा — "भाई, बस कर, अब सो जाते हैं।" और तब जो नींद आएगी, वह नेचुरल होगी। शुरुआत के दिनों में अगर आप पूरी रात भी सीरीज देखकर निकाल दें, तो भी वह शराब पीने से लाख गुना बेहतर है। कम से कम आपका लीवर तो सुरक्षित है!

तरीका 2: ओशो या लंबे लेक्चर (The Power of Audio)

अगर आपको स्क्रीन देखना पसंद नहीं है, या आपकी आंखों में जलन हो रही है, तो दूसरा ब्रह्मास्त्र है — सुनना (Listening)। लेकिन गाने नहीं सुनने हैं, आपको सुनना है "विचार"।

ओशो (Osho), जे. कृष्णमूर्ति, या एलन वाट्स जैसे विचारकों को सुनना शुरू करो। हेडफोन लगाओ, कमरे की लाइट बंद करो, लेट जाओ और सिर्फ उनकी आवाज़ पर फोकस करो।

इसमें जादू क्या है?
ओशो या ऐसे किसी भी गहरे वक्ता की आवाज़ में एक खास 'रिदम' (Rhythm) होती है। वे बहुत ठहराव के साथ बोलते हैं। बीच-बीच में 'पॉज' लेते हैं। जब आप उन्हें ध्यान से सुनते हैं, तो आपका दिमाग "Active Listening Mode" में चला जाता है।

शराबी दिमाग की सबसे बड़ी समस्या होती है "Overthinking" (फालतू के विचार)। "मेरा क्या होगा?", "मैंने जिंदगी खराब कर ली", "एक पैग पी लूं क्या?" — ये विचार शोर मचाते रहते हैं। लेकिन जब आप किसी लेक्चर को पूरे ध्यान से सुनते हैं, तो आपके अंदर की यह बकवास (Inner Chatter) बंद हो जाती है। आप एक तरह के 'ध्यान' (Meditation) में चले जाते हैं।

लंबे लेक्चर्स (1-2 घंटे वाले) सबसे बेस्ट हैं। सुनते-सुनते कब आपका कॉन्शियस माइंड ऑफ हो जाएगा और आप गहरी नींद (Deep Sleep) में फिसल जाएंगे, आपको पता भी नहीं चलेगा। यह तरीका उन लोगों के लिए रामबाण है जिन्हें रात में एंजायटी या घबराहट होती है।

तरीका 3: किताब पढ़ो (Gen Z का दुःस्वप्न, लेकिन सबसे असरदार)

तीसरा तरीका, जो शायद आजकल के Gen Z और रील देखने वाली पब्लिक को बोरिंग लगे, लेकिन यह सबसे पावरफुल (Most Powerful) है। किताब पढ़ो। और किंडल या मोबाइल पर नहीं, कागज वाली असली किताब।

साइंस कहती है कि स्क्रीन (मोबाइल/टीवी) से निकलने वाली 'Blue Light' हमारे दिमाग को सिग्नल देती है कि "अभी दिन है, जागते रहो।" यह मेलटोनिन (नींद का हार्मोन) को बनने से रोकती है। लेकिन किताब? किताब शांत है।

पढ़ने से नींद कैसे आती है?
जब आप पढ़ते हैं, तो आपकी आँखों को बाएं से दाएं लगातार मूव करना पड़ता है (Saccadic Movements)। साथ ही, दिमाग को शब्दों को विजुअलाइज करना पड़ता है। यह एक मेहनत वाला काम है।

शराब छोड़ने के बाद दिमाग वैसे ही थका होता है। जैसे ही आप 20-25 पन्ने पढ़ते हैं, आँखों की मांसपेशियां थकने लगती हैं और दिमाग पर एक "Cognitive Load" पड़ता है। दिमाग सिग्नल भेजता है — "भाई, शटर गिरा दे, अब नहीं पढ़ा जा रहा।"

बस यही वो पल है! किताब छाती पर रखकर सोने का जो सुकून है, वो किसी नशे में नहीं। कोई भी फिक्शन, सेल्फ-हेल्प या बायोग्राफी उठा लो। 20 पन्ने पढ़ने के बाद ही दिमाग शराब नहीं, नींद मांगेगा। दिमाग को नींद दो, उसे वो शांति दो जिसका वो हकदार है।

🚀 Vivek Bhai की सलाह (Mindset Shift)

भाई, मेरा एक सिंपल सा कहना है — अपनी दुनिया बड़ी करो।

जब तक आपकी दुनिया सिर्फ 'शाम, दोस्त, चखना और बोतल' तक सीमित रहेगी, तब तक शराब छोड़ना मुश्किल लगेगा। साइंस और लॉजिक वाली मूवी देखो, समझो, जानो कि दुनिया क्या है? ब्रह्मांड (Universe) कितना बड़ा है? ब्लैक होल्स क्या हैं? एआई (AI) कैसे काम कर रहा है? इतिहास में क्या हुआ था?

सिर्फ शराब को दुनिया मत बनाओ।

जब आप ज्ञान (Knowledge) की तरफ भागते हो, तो आपको एहसास होता है कि हम और हमारी समस्याएं इस ब्रह्मांड में धूल के कण के बराबर भी नहीं हैं। यह एहसास आपको "Ego" और "Addiction" दोनों से मुक्त करता है। जब दिमाग में बड़े विचार आएंगे, तो शराब जैसी छोटी और घटिया चीज के लिए जगह ही नहीं बचेगी। क्यूरियस बनो, शराबी नहीं।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1. शराब छोड़ने के बाद कितने दिन तक नींद नहीं आती?
आमतौर पर 3 से 7 दिन सबसे मुश्किल होते हैं। इसे 'Acute Withdrawal' कहते हैं। उसके बाद 2-3 हफ्ते तक नींद कच्ची रह सकती है। लेकिन 21 दिन के बाद स्लीप साइकिल (Sleep Cycle) पटरी पर लौटने लगता है। हार मत मानना!


Q2. क्या मैं नींद की गोली (Sleeping Pills) ले सकता हूँ?
बिल्कुल नहीं! विवेक भाई की सख्त मनाही है। नींद की गोली भी एक नशा है। अगर आप शराब छोड़कर गोली पर आ गए, तो आपने सिर्फ नशा बदला है, आदत नहीं। डॉक्टर की सलाह के बिना यह गलती कभी न करें।


Q3. रात को बहुत डरावने सपने (Nightmares) आते हैं, ऐसा क्यों?
यह एक बहुत अच्छा संकेत है! इसे 'REM Rebound' कहते हैं। सालों से आपने सपनों को शराब से दबा रखा था। अब जब दिमाग रिकवर हो रहा है, तो वह सारे सपने एक साथ रिलीज कर रहा है। यह कुछ दिन चलेगा, फिर ठीक हो जाएगा। डरें नहीं, इसका मतलब है दिमाग ठीक हो रहा है।


Q4. क्या एक्सरसाइज करने से नींद आएगी?
100%। शाम को (सोने से 3 घंटे पहले नहीं) हैवी वर्कआउट करें। जब शरीर शारीरिक रूप से थकेगा (Physical Exhaustion), तो वह दिमाग को सोने पर मजबूर कर देगा। पसीना बहाना शराब निकालने का सबसे तेज तरीका है।


Q5. अगर नींद न आए तो क्या बिस्तर पर पड़े रहें?
नहीं। अगर 20 मिनट तक नींद न आए, तो उठ जाएं। दूसरे कमरे में जाएं, थोड़ा पानी पिएं, टहलें या किताब पढ़ें। बिस्तर पर लेटकर घड़ी न देखें, इससे स्ट्रेस बढ़ता है और नींद और दूर भागती है।

Vivek Hardaha - Recovery Writer
Vivek Hardaha
M.Sc (CS), MA Sociology
Alcohol Recovery Experience Since 2018
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