यह कहानी किसी फिल्म की नहीं है। यह उस इंसान की है जिसने शराब की लत को अंदर से जिया है — हर डर, हर शर्म, और हर टूटन के साथ।
बात उस समय की है जब मैं पूरी तरह से शराब का आदी बन चुका था। यह कोई अचानक हुआ बदलाव नहीं था — कोई एक दिन ऐसा नहीं आया जब मैंने तय किया कि "अब मैं शराबी बनूँगा।" यह धीरे-धीरे हुआ, चुपचाप, बिना किसी announcement के। मेरी ज़िंदगी के हर हिस्से में शराब ने अपनी जगह बना ली — सुबह, शाम, रात, खुशी, गम, बोरियत, सब जगह। तब मुझे यह अहसास भी नहीं था कि जिसे मैं "आदत" या "timepass" समझ रहा हूँ, वह कब "लत" बन चुकी है।
अगर आप यह पढ़ रहे हैं, तो शायद आप भी उसी जगह खड़े हैं — या आपका कोई अपना वहाँ है। यह लेख कोई उपदेश नहीं है। यह एक ईमानदार कहानी है — मेरी अपनी। शायद इसमें आपको अपना कोई हिस्सा दिखे।
शराब की लत कैसे लगती है – मेरी कहानी
घर में रोज़ लड़ाई होती थी, खासकर पापा से। बात-बात पर तनाव, चीख-चिल्लाहट, और वो भारी सन्नाटा जो लड़ाई के बाद पूरे घर में पसर जाता था। हालात इतने बिगड़ चुके थे कि एक समय उन्होंने मुझे घर से निकाल दिया। एक-दो हफ्ते तक मैं अपनी पत्नी और घर से दूर, नशे में इधर-उधर भटकता रहा। कभी किसी दोस्त के घर, कभी किसी और के। खाना होटल में, या कहीं किसी ने दे दिया तो वहीं। रात कहाँ कटेगी — यह तय नहीं होता था, लेकिन शराब कहाँ मिलेगी — यह हमेशा तय होता था।
उस समय मेरे पास पैसे थे। और आज पीछे मुड़कर देखता हूँ तो समझ आता है — पैसे होना भी शराब की लत को और गहरा कर देता है। जब जेब में पैसा हो, तो शराब तक पहुँच आसान हो जाती है, और दिमाग को खुद को रोकने का कोई कारण नहीं मिलता। अगर मेरे पास पैसे नहीं होते, तो शायद मजबूरी में रुकता। लेकिन पैसे ने वह मजबूरी भी छीन ली।
शराब की लत कैसे लगती है — यह सवाल बहुत से लोग पूछते हैं। मेरा जवाब है: लत लगने का कोई एक moment नहीं होता। यह ऐसे है जैसे पानी में धीरे-धीरे डूबना — जब तक पता चले, तब तक सिर ऊपर रखना मुश्किल हो चुका होता है।
शराब की लत के लक्षण जो मुझे तब समझ नहीं आए
मेरी हालत यह हो चुकी थी कि शराब के बिना चैन नहीं आता था। जब भी छोड़ने की कोशिश करता, डर और घबराहट इतनी बढ़ जाती कि लगता था जैसे कुछ बहुत गलत होने वाला है — जैसे अभी मर जाऊँगा, या पागल हो जाऊँगा। उस डर से बचने का एक ही सहारा था — शराब। एक गिलास, और सब "ठीक"।
दिमाग में हर समय बस एक ही बात चलती रहती थी: "किसी भी तरह शराब मिल जाए।" कोई मरे, किसी का जन्म हो, शादी हो या पार्टी — सबसे पहले दिमाग में बस शराब। हर जगह जाने से पहले यही planning — "वहाँ शराब कैसे मिलेगी?" हर रिश्ता, हर मौका, हर दिन — सब शराब के इर्द-गिर्द।
आज यह लिखते हुए भी वह समय नर्क से कम नहीं लगता। बाहर से शायद normal दिखता रहा हूँ, लेकिन अंदर से टूट चुका था।
असलियत यह है कि उस दौर की बहुत सी बातें मुझे खुद याद नहीं हैं। Blackouts — जब नशे में इतना डूब जाओ कि अगली सुबह याद ही न रहे कि रात को क्या हुआ, किससे बात की, क्या बोला। मेरे घरवाले और दोस्त बताते हैं कि मैं कैसा हो गया था — कैसी बातें करता था, कैसा बर्ताव करता था। उनके नाम मैं नहीं लेना चाहता, लेकिन उनकी आँखों में जो चिंता, जो दर्द, जो थकान थी — वह आज भी याद है।
वो लक्षण जो मैंने अनदेखा किए
आज पीछे मुड़कर देखता हूँ तो साफ दिखता है कि लत के संकेत बहुत पहले से दिख रहे थे — बस मैंने उन्हें पहचाना नहीं, या पहचानना नहीं चाहा। सुबह उठते ही पीने का मन करना, बिना शराब के हाथ काँपना, रात को नींद न आना, खाने का मन न करना, हर बात में चिड़चिड़ापन, और सबसे बड़ा — यह सोचना कि "मैं कभी भी छोड़ सकता हूँ, बस अभी नहीं।" यही सबसे बड़ा झूठ था जो मैं खुद को बोलता रहा।
सुबह उठते ही शराब पीने का मन करना — यह आखिरी चेतावनी होती है। अगर आप इस stage पर हैं, तो समझ लो कि अब देर करने का वक्त नहीं है।
क्या आप शराबी हो? खुद से ये सवाल ईमानदारी से पूछो
किसी और के कहने का इंतज़ार मत करो। कोई डॉक्टर, कोई परिवार वाला, कोई दोस्त — कोई भी आपको तब तक नहीं बचा सकता जब तक आप खुद को सच न बताएँ। अपने आप से ईमानदारी से ये सवाल पूछो:
- क्या आपकी सबसे पहली प्राथमिकता शराब बन चुकी है?
- क्या सुबह उठते ही सबसे पहले पीने का ख्याल आता है?
- क्या रोज़ रात को शराब के बिना सोना मुश्किल लगता है?
- अगर न पियो तो बेचैनी, घबराहट या काँपना शुरू होता है?
- कोई भी काम शुरू करने से पहले शराब याद आती है?
- क्या आप शराब पीने की मात्रा या बार-बार पीने के बारे में झूठ बोलते हैं?
- क्या आपके रिश्तों में शराब की वजह से दरार आई है?
मेरे भाई, अगर इनमें से कोई दो बातें भी तुमसे मेल खा रही हैं, तो समझ लो कि तुम लत की पहली सीढ़ी पर खड़े हो — या शायद उससे भी आगे। अभी समय है। इसे नज़रअंदाज़ मत करो। क्योंकि मैंने नज़रअंदाज़ किया, और जो कीमत चुकाई वह किसी को न चुकानी पड़े।
शराब पीने की आदत कब लत बन जाती है
लत तब नहीं बनती जब कोई कभी-कभार किसी occasion पर पी ले। लत तब बनती है जब शराब आपकी भावनाओं को संभालने का ज़रिया बन जाती है। जब डर लगे — शराब। तनाव हो — शराब। खालीपन महसूस हो — शराब। दुख हो — शराब। खुशी हो — तब भी शराब। जब हर emotion का एक ही जवाब शराब बन जाए, तो यह लत है।
शराब दिमाग पर कैसे असर करती है — यह समझना ज़रूरी है। शराब दिमाग के reward system को hijack कर लेती है। धीरे-धीरे दिमाग को "normal" महसूस करने के लिए भी शराब चाहिए होने लगती है। बिना शराब के सब कुछ boring, भारी, और बेमतलब लगता है। यही addiction का core है।
बहुत से लोग breakup के बाद शराब पीना शुरू करते हैं — "बस दर्द कम करने के लिए।" लेकिन वह "बस" कब "रोज़" बन जाता है, पता ही नहीं चलता। Emotional pain को शराब से दबाना सबसे common तरीका है जिससे लत शुरू होती है — और सबसे खतरनाक भी।
शराब छोड़ते वक्त मौत जैसा डर क्यों लगता है
जब मैंने छोड़ने की कोशिश की, तो ऐसा लगा जैसे कुछ बहुत बुरा होने वाला है। दिल इतना तेज़ धड़कता कि लगता था छाती फट जाएगी। दिमाग कंट्रोल में नहीं रहता — हज़ार विचार एक साथ आते, कोई भी positive नहीं। पसीना, काँपना, और वो अजीब सा अहसास कि "अभी कुछ हो जाएगा।"
कई लोग इस डर को समझ नहीं पाते। बाहर से देखने वाले को लगता है कि "बस पीना बंद करो, इतना क्या हो जाएगा।" लेकिन जो इस withdrawal से गुज़रा है, वही जानता है कि यह कितना real और कितना डरावना होता है। यह सिर्फ मन का वहम नहीं — यह शरीर की physical reaction है जो serious मामलों में जानलेवा भी हो सकती है।
शराब छोड़ते वक्त मौत का डर — इस पर विस्तार से पढ़ें। यह समझना बहुत ज़रूरी है, खासकर उनके लिए जो सालों से रोज़ पी रहे हैं।
रात का अंधेरा और शराब का रिश्ता
शराब की लत का एक और चेहरा है जो दिन में नहीं दिखता — वो रात को दिखता है। नशे में अक्सर ऐसा होता है कि अचानक आँखों में आँसू आ जाते हैं। बिना किसी वजह के — या शायद हज़ार वजहों के साथ जो दिन में दबी रहती हैं।
शराब emotions को suppress करती है, लेकिन हमेशा के लिए नहीं। रात को जब नशा peak पर होता है, तो वो सारा दबा हुआ दर्द, वो guilt, वो अकेलापन — सब एक साथ बाहर आता है। रात को शराब पीकर रोना क्यों आता है — यह सवाल बहुत लोग पूछते हैं, और इसका जवाब बहुत गहरा है। शराब आँसू नहीं लाती — वो बस उस दर्द का ढक्कन खोल देती है जो अंदर जमा होता रहता है।
झूठी दवाइयाँ और झूठे वादे — मैंने भी सुने
लत में फँसा इंसान किसी भी सहारे को पकड़ना चाहता है — कोई भी तिनका मिले, बस पकड़ लो। इसी कमज़ोरी का फायदा उठाकर बाज़ार में झूठी दवाइयाँ और नकली इलाज बिकते हैं। सड़क किनारे तंबू वाले "वैद्य", WhatsApp पर आने वाले "miracle drops", और ऐसे बाबा जो "guaranteed 3 दिन में शराब छुड़वाने" का दावा करते हैं।
मैंने भी ऐसे कई नाम सुने। कुछ लोगों ने suggest भी किए। लेकिन सच्चाई कुछ और ही है — इनमें से ज़्यादातर बस साधारण चूर्ण या पाउडर बेचते हैं जिनका शराब की लत से कोई वैज्ञानिक संबंध नहीं। शराब छुड़ाने की झूठी दवाई और शराब छुड़ाने वाले बाबा का scam — ये दोनों लेख उस पूरे खेल को expose करते हैं। अगर आप या आपका कोई अपना ऐसे किसी "इलाज" की तरफ आकर्षित हो रहा है, तो पहले ये पढ़ लें।
अगर सच में बदलना चाहते हो — तो सच सुनो
मैं कोई चमत्कार का वादा नहीं करता। कोई "7 दिन में शराब छोड़ो" वाला formula नहीं दूँगा। क्योंकि ऐसा कोई formula होता ही नहीं।
लेकिन इतना ज़रूर कह सकता हूँ — अगर तुम सच में खुद को बचाना चाहते हो, तो अकेले मत लड़ो। समय रहते किसी अच्छे psychiatrist या addiction specialist से बात करो। Government hospitals में यह सुविधा अक्सर free या बहुत कम खर्च में मिलती है। मदद माँगना कमज़ोरी नहीं है — मदद माँगना उस हिम्मत का सबूत है जो शराब अभी तक नहीं तोड़ पाई।
शराब छुड़ाने का सबसे आसान तरीका — इसमें कुछ practical steps हैं जो शुरुआत करने में मदद कर सकते हैं। और शराब छोड़ने के लिए कसम क्यों नहीं खानी चाहिए — यह भी पढ़ लो, ताकि वही पुरानी गलती दोबारा न हो।
आम गलतियाँ जो शराबी और उनका परिवार करता है
गलती #1: "मैं कभी भी छोड़ सकता हूँ।" यह सबसे बड़ा झूठ है जो हर शराबी खुद को बोलता है। मैंने भी बोला — सालों तक। अगर सच में छोड़ सकते हो, तो आज छोड़ो। अगर नहीं छोड़ पा रहे, तो accept करो कि यह लत है।
गलती #2: "बस social drinking है।" जब social drinking रोज़ की drinking बन जाए, जब बिना occasion के भी पीने का मन करे, जब quantity बढ़ती जाए — तो यह social नहीं रहा। यह लत की शुरुआत है।
गलती #3: परिवार का ताने मारना और शर्मिंदा करना। "तुमसे कभी कुछ नहीं होगा", "तुमने हमारी ज़िंदगी बर्बाद कर दी" — ये बातें इंसान को और नीचे धकेलती हैं। शर्म और guilt recovery में मदद नहीं करते — ये और ज़्यादा पीने की वजह बनते हैं।
गलती #4: झूठे इलाज पर भरोसा करना। तंबू वाली दवा, बाबा का ताबीज़, online "miracle cure" — ये सब पैसे और उम्मीद दोनों बर्बाद करते हैं। असली इलाज qualified doctor के पास है, किसी सड़क किनारे नहीं।
गलती #5: Relapse को अंत समझना। अगर एक बार छोड़कर फिर पी लिया, तो "अब कभी नहीं छूटेगी" — यह सोचना गलत है। Relapse recovery का हिस्सा है, असफलता नहीं। हर बार कुछ नया सीखते हो — कि कहाँ कमज़ोर पड़े, कौन सा trigger था।
Vivek Bhai ki Advice
जब कोई इंसान अपनी शराब की कहानी ईमानदारी से share करता है, तो उसमें बहुत हिम्मत लगती है। यह लेख उसी हिम्मत का नतीजा है। ASAR.blog पर काम करते हुए मैंने देखा है कि सबसे powerful tool कोई दवा नहीं, कोई therapy नहीं — सबसे powerful tool ईमानदारी है। अपने आप से ईमानदारी। "हाँ, मुझे लत है" — बस यह एक sentence बोलना recovery की सबसे मुश्किल और सबसे ज़रूरी step है।
दूसरी बात — अगर आप यह कहानी पढ़कर खुद को इसमें पहचान रहे हैं, तो please इसे सिर्फ पढ़कर भूल मत जाइए। कुछ करिए। चाहे एक फ़ोन call हो किसी doctor को, चाहे एक बातचीत हो किसी भरोसेमंद इंसान से — कुछ तो करिए। पढ़ना अच्छा है, लेकिन करना ज़रूरी है।
और तीसरी बात जो मैं हमेशा कहता हूँ — recovery में कोई shortcut नहीं है। न कोई जादुई दवा, न कोई 7-दिन का plan, न कोई YouTube video जो ज़िंदगी बदल दे। Recovery रोज़ की मेहनत है — छोटी-छोटी, boring, thankless मेहनत। लेकिन एक दिन पीछे मुड़कर देखोगे तो पता चलेगा कि उन्हीं छोटे-छोटे कदमों ने ज़िंदगी बदल दी।
ज़रूरी बातें एक नज़र में
✓ शराब की लत अचानक नहीं लगती — धीरे-धीरे, चुपचाप बढ़ती है।
✓ "मैं कभी भी छोड़ सकता हूँ" — यह सबसे बड़ा झूठ है जो हर शराबी खुद को बोलता है।
✓ सुबह उठते ही पीने का मन करना सबसे गंभीर warning sign है।
✓ Blackouts (रात की याद न रहना) लत की गहराई का संकेत है।
✓ झूठी दवाइयों और बाबाओं से दूर रहें — असली इलाज doctor के पास है।
✓ परिवार ताने मारने की बजाय medical help दिलवाने पर focus करे।
✓ Relapse असफलता नहीं — recovery का हिस्सा है।
✓ "मुझे मदद चाहिए" — यह एक sentence बोलना सबसे बड़ी हिम्मत है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
शराब की आदत और लत में क्या फर्क है?
आदत तब होती है जब आप चाहें तो रुक सकते हैं — बस prefer करते हैं पीना। लत तब होती है जब रुकना चाहें और रुक न पाएँ, जब बिना पिए शरीर या मन काम न करे, जब शराब ज़रूरत बन जाए। अगर "मैं कभी भी छोड़ सकता हूँ" बोलते हो लेकिन छोड़ नहीं पा रहे — तो यह लत है।
शराब की लत कितने समय में लगती है?
यह हर इंसान के लिए अलग होता है। कुछ लोगों में कुछ महीनों में लत लग जाती है, कुछ में सालों लगते हैं। यह genetics, mental health, पीने की मात्रा, और ज़िंदगी के हालात — सब पर निर्भर करता है। लेकिन एक बात पक्की है — कोई भी insured नहीं है। "मुझे नहीं लगेगी" — यह सोचना सबसे बड़ी गलती है।
क्या शराबी इंसान normal ज़िंदगी में वापस आ सकता है?
हाँ, बिल्कुल। लाखों लोगों ने शराब छोड़कर normal, खुशहाल ज़िंदगी शुरू की है। लेकिन इसके लिए सही इलाज, धैर्य, और support system ज़रूरी है। Recovery एक process है — रातोंरात नहीं होती, लेकिन होती ज़रूर है।
परिवार को कैसे पता चले कि कोई शराबी है?
कुछ common संकेत हैं: छुपकर पीना, पीने की मात्रा के बारे में झूठ बोलना, सुबह पीना, बिना शराब के चिड़चिड़ा या बेचैन रहना, काम और रिश्तों में गिरावट, पैसों की तंगी (बिना किसी स्पष्ट कारण के), और शराब के बिना किसी भी social situation में uncomfortable महसूस करना।
क्या शराब की लत genetic होती है?
Research बताती है कि genetics एक factor है — अगर परिवार में शराब की लत का इतिहास है तो risk ज़्यादा होता है। लेकिन genetic predisposition का मतलब guaranteed लत नहीं है। Environment, mental health, और personal choices भी बराबर का role निभाते हैं।
शराबी इंसान से कैसे बात करें कि वो बुरा न माने?
सबसे ज़रूरी — जब वो नशे में हो तब बात न करें। शांत और private माहौल में, बिना ताने मारे, अपनी चिंता express करें। "तुम शराबी हो" की जगह कहें "मुझे तुम्हारी सेहत की चिंता है।" Judge न करें, सुनें, और medical help का option रखें। ज़बरदस्ती से कुछ नहीं होता — लेकिन प्यार से बातचीत बीज बो सकती है।
क्या कसम खाने से शराब छूट जाती है?
ज़्यादातर मामलों में नहीं। कसम एक emotional moment में ली जाती है, लेकिन लत दिमाग की chemistry है — और chemistry कसम नहीं सुनती। शराब छोड़ने के लिए कसम क्यों नहीं खानी चाहिए — यह ज़रूर पढ़ें।
आखिरी बात
यह कहानी मेरी है, लेकिन यह सिर्फ मेरी नहीं है। यह हर उस इंसान की है जो रात को सोते वक्त सोचता है "कल नहीं पीऊँगा" और सुबह वहीं पहुँच जाता है जहाँ से भागना चाहता था। यह उन परिवारों की है जो थक चुके हैं — रोते-रोते, लड़ते-लड़ते, उम्मीद रखते-रखते।
अगर तुम अभी भी सोच रहे हो कि "मैं शराबी नहीं हूँ" — तो ठीक है। लेकिन एक बार शराब कैसे छोड़ें ज़रूर पढ़ो। शायद उसमें कोई ऐसी बात मिल जाए जो आज नहीं तो कल काम आए।
और अगर मेरी बात माननी है, तो इस ब्लॉग के साथ बने रहो। मैं वादा नहीं करता कि रास्ता आसान होगा। लेकिन इतना ज़रूर है — एक दिन शराब तुमसे इतनी दूर होगी कि उसका वापस लौटना मुश्किल हो जाएगा। बस उस एक दिन तक पहुँचने की ज़िद रखो।
बात उस समय की है जब मैं पूरी तरह से शराब का आदी बन चुका था। यह कोई अचानक हुआ बदलाव नहीं था, बल्कि धीरे-धीरे, चुपचाप, मेरी ज़िंदगी के हर हिस्से में शराब ने अपनी जगह बना ली थी। तब मुझे यह अहसास भी नहीं था कि जिसे मैं “आदत” समझ रहा हूँ, वह कब “लत” बन चुकी है।
शराब की लत कैसे लगती है – मेरी कहानी
घर में रोज़ लड़ाई होती थी, खासकर पापा से। हालात इतने बिगड़ चुके थे कि एक समय उन्होंने मुझे घर से निकाल दिया। एक-दो हफ्ते तक मैं अपनी पत्नी और घर से दूर, नशे में इधर-उधर भटकता रहा। कभी किसी दोस्त के घर, कभी किसी और के। खाना होटल में, या कहीं किसी ने दे दिया तो वहीं।
उस समय मेरे पास पैसे थे। और आज पीछे मुड़कर देखता हूँ तो समझ आता है — पैसे होना भी शराब की लत को और गहरा कर देता है। जब जेब में पैसा हो, तो शराब तक पहुँच आसान हो जाती है, और दिमाग को खुद को रोकने का कोई कारण नहीं मिलता।
शराब की लत के लक्षण जो मुझे तब समझ नहीं आए
मेरी हालत यह हो चुकी थी कि शराब के बिना चैन नहीं आता था। जब भी छोड़ने की कोशिश करता, डर और घबराहट इतनी बढ़ जाती कि लगता था जैसे कुछ बहुत गलत होने वाला है। उस डर से बचने का एक ही सहारा था — शराब।
दिमाग में हर समय बस एक ही बात चलती रहती थी: “किसी भी तरह शराब मिल जाए।” कोई मरे, किसी का जन्म हो, शादी हो या पार्टी — सबसे पहले शराब। आज यह लिखते हुए भी वह समय नर्क से कम नहीं लगता।
असलियत यह है कि उस दौर की बहुत सी बातें मुझे खुद याद नहीं हैं। मेरे घरवाले और दोस्त बताते हैं कि मैं कैसा हो गया था। उनके नाम मैं नहीं लेना चाहता, लेकिन उनकी आँखों में जो चिंता थी, वह आज भी याद है।
क्या आप शराबी हो? खुद से ये सवाल पूछो
किसी और के कहने से पहले, अपने आप से ईमानदारी से ये सवाल पूछो:
- क्या आपकी सबसे पहली प्राथमिकता शराब है?
- क्या सुबह उठते ही पीने का मन करता है?
- क्या रोज़ रात को शराब ज़रूरी लगती है?
- अगर न पियो तो बेचैनी होती है?
- कोई भी काम शुरू करने से पहले शराब याद आती है?
मेरे भाई, अगर इनमें से कोई दो बातें भी तुमसे मेल खा रही हैं, तो समझ लो तुम लत की पहली सीढ़ी पर खड़े हो। अभी समय है। इसे नज़रअंदाज़ मत करो।
शराब पीने की आदत कब लत बन जाती है
लत तब नहीं बनती जब कोई कभी-कभार पी ले। लत तब बनती है जब शराब आपकी भावनाओं को संभालने लगती है। जब डर, तनाव, खालीपन, या दुख से भागने का एक ही तरीका शराब बन जाए।
सुबह शराब पीने का मन क्यों करता है — इस सवाल के पीछे वही डर और बेचैनी होती है, जिसके बारे में मैंने अपने अनुभव में जिया है। इसी पर एक विस्तार से लेख यहाँ है: सुबह शराब पीने का मन क्यों करता है
शराब छोड़ते वक्त मौत जैसा डर क्यों लगता है
जब मैंने छोड़ने की कोशिश की, तो ऐसा लगा जैसे कुछ बहुत बुरा होने वाला है। दिल तेज़ धड़कता, दिमाग कंट्रोल में नहीं रहता। कई लोग इस डर को समझ नहीं पाते, लेकिन जो इससे गुज़रा है वही जानता है।
अगर आप इस डर को महसूस कर चुके हैं, तो यह पढ़ना ज़रूरी है: शराब छोड़ते वक्त मौत का डर
झूठी दवाइयाँ और झूठे वादे
लत में फँसा इंसान किसी भी सहारे को पकड़ना चाहता है। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर बाज़ार में झूठी दवाइयाँ और नकली इलाज बिकते हैं। मैंने भी ऐसे कई नाम सुने, लेकिन सच्चाई कुछ और ही है।
इस पर ASAR ब्लॉग में साफ-साफ लिखा गया है: शराब छुड़ाने की झूठी दवाई
अगर सच में बदलना चाहते हो
मैं कोई चमत्कार का वादा नहीं करता। लेकिन इतना ज़रूर कह सकता हूँ — अगर तुम सच में खुद को बचाना चाहते हो, तो अकेले मत लड़ो। समय रहते किसी अच्छे डॉक्टर से बात करो। मदद माँगना कमजोरी नहीं है।
और अगर मेरी बात माननी है, तो इस ब्लॉग के साथ बने रहो। मैं वादा नहीं करता कि रास्ता आसान होगा, लेकिन इतना ज़रूर है — एक दिन शराब तुमसे इतनी दूर होगी कि वापस लौटना मुश्किल हो जाएगा।
आख़िर में, अगर तुम अभी भी सोच रहे हो कि “मैं शराबी नहीं हूँ”, तो यह पढ़ो और खुद तय करो: शराब कैसे छोड़े
Team ASAR | Addiction Awareness
