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शराब कैसे छोड़ें? जब मन ही साथ न दे | Asar

Disclaimer: Yeh article personal anubhav aur samajik jagrukta par aadharit hai. Yeh kisi bhi prakar ki medical salah, treatment ya diagnosis nahi hai. Agar aapko ya kisi ko madad chahiye, toh kripya qualified professional se sampark karein.
शराब कैसे छोड़ें – जब मन साथ न दे तो क्या करें, पूरी गाइड

शराब छोड़ना सिर्फ बोतल रखने की बात नहीं है — यह खुद से एक ईमानदार बातचीत की शुरुआत है।

शराब कैसे छोड़ें? जब मन ही साथ न दे

अगर आप "शराब कैसे छोड़ें" खोज रहे हैं, तो बहुत संभव है कि यह आपकी पहली कोशिश नहीं है। शायद आपने पहले भी कई बार ठान लिया हो। कुछ दिन अच्छे गुज़रे हों, हिम्मत बनी रही हो, और फिर एक शाम ऐसी आई हो जहाँ सब बिखर गया। बाहर से देखने वालों को लगता है कि यह बस एक आदत है जो "इच्छाशक्ति" से छूट जाएगी। लेकिन जो इंसान इस दौर से गुज़र रहा होता है, वह जानता है कि असली लड़ाई बोतल से नहीं, बल्कि अपने अंदर चल रही होती है।

यह लेख आपको कोई चमत्कारी उपाय या 7-दिन का प्लान नहीं देगा। यहाँ कोई जड़ी-बूटी का नुस्खा नहीं है और न ही कोई झूठा वादा। यह लेख उस सवाल को सामने रखता है जिसे ज़्यादातर लोग पूछने से बचते हैं — जब मन ही साथ न दे, जब अंदर से हार मान चुके हों, तब शराब छोड़ना आखिर शुरू कैसे होता है?

अगर आप सच में इस सवाल का जवाब तलाश रहे हैं, तो इस पूरे लेख को ध्यान से पढ़ें। यहाँ जो बातें लिखी हैं, वो किताबों से नहीं बल्कि उस अनुभव से आई हैं जो लाखों लोगों ने जिया है।

समस्या शराब नहीं, मन का रिश्ता है

ज़्यादातर लोग मानते हैं कि शराब की लत शरीर की होती है। डॉक्टर भी अक्सर शारीरिक निर्भरता (physical dependence) की बात करते हैं। यह सच है कि शरीर को शराब की आदत लग जाती है, लेकिन शरीर कुछ दिनों से लेकर कुछ हफ्तों में संभल जाता है। असली समस्या शरीर नहीं, मन है।

शराब सिर्फ एक तरल पदार्थ नहीं रहती — वह धीरे-धीरे एक "coping mechanism" बन जाती है। दुख से भागने का रास्ता, खालीपन भरने का तरीका, और खुद से न मिलने का बहाना। जब कोई इंसान बार-बार किसी चीज़ का सहारा लेता है अपनी तकलीफ से बचने के लिए, तो वह चीज़ उसकी ज़रूरत बन जाती है।

इसलिए जब आप सर्च करते हैं "शराब कैसे छोड़ें", तो असल में आप यह पूछ रहे होते हैं — उस खालीपन का क्या करें जहाँ शराब ने अपनी जगह बना ली है? जब तक यह सवाल साफ नहीं होता, तब तक शराब छोड़ना बहुत मुश्किल रहता है। क्योंकि आप बोतल तो हटा सकते हैं, लेकिन वह जगह खाली रहती है — और खाली जगह हमेशा भरी जाती है, चाहे फिर से शराब से ही क्यों न हो।

अगर आप यह समझना चाहते हैं कि शराब की लत कैसे और क्यों लगती है, तो इसे ज़रूर पढ़ें। यह समझ आपकी नींव मज़बूत करेगी।

कसम, वादा और मोटिवेशन क्यों काम नहीं करते

हर शराब पीने वाले इंसान ने कभी न कभी कसम खाई है। किसी ने मंदिर में हाथ जोड़कर, किसी ने बीवी के सामने, किसी ने बच्चों की कसम उठाई। कोई सोमवार से शुरू करता है, कोई नए साल से, कोई जन्मदिन से। और कुछ लोग तो डर के मारे छोड़ते हैं — लिवर की रिपोर्ट देखकर या डॉक्टर की चेतावनी सुनकर।

दिक्कत यह है कि ये सारे फैसले दिमाग के उस हिस्से से आते हैं जो प्लानिंग करता है, जो तर्क से सोचता है, जो भविष्य का हिसाब लगाता है। लेकिन लत उस हिस्से से चलती है जो दर्द से बचना चाहता है, जो तुरंत आराम खोजता है, जो अभी इस पल की तकलीफ से राहत चाहता है। इन दोनों हिस्सों की लड़ाई में अक्सर वह हिस्सा जीतता है जो दर्द से भाग रहा होता है।

इसीलिए सुबह लिया गया पक्का फैसला शाम तक ढीला पड़ जाता है। दोपहर तक "मैं नहीं पीऊँगा" का इरादा शाम को "बस आज आखिरी बार" में बदल जाता है। इसे इच्छाशक्ति की कमजोरी समझना सबसे बड़ी गलती है। यह कमजोरी नहीं है — यह दिमाग का survival mode है जो हमेशा आराम और सुरक्षा चुनता है, भले ही वह आराम नकली हो।

इसी वजह से शराब छोड़ने के लिए कसम क्यों नहीं खानी चाहिए — यह समझना बहुत ज़रूरी है। कसम एक बार के फैसले पर टिकी होती है, जबकि recovery एक लंबी प्रक्रिया है।

मोटिवेशन का सच

YouTube पर मोटिवेशनल वीडियो देखकर बहुत से लोगों को लगता है कि बस एक "push" की ज़रूरत है। सच यह है कि मोटिवेशन एक भावना है — और भावनाएँ बदलती रहती हैं। आज जो जोश है, कल वह ठंडा पड़ सकता है। शराब छोड़ने के लिए मोटिवेशन से ज़्यादा ज़रूरी है समझ। जब आप समझते हैं कि आप क्यों पीते हैं, तब आपको किसी बाहरी प्रेरणा की ज़रूरत कम पड़ती है।

बार-बार relapse क्यों होता है

बहुत से लोग शराब छोड़ते हैं — कभी एक हफ्ते, कभी एक महीने, कभी तीन महीने के लिए। फिर अचानक एक दिन वापस पी लेते हैं। समाज इसे चरित्र की कमी कह देता है। परिवार निराश हो जाता है। और खुद वह इंसान इतना शर्मिंदा होता है कि अगली बार कोशिश करने की हिम्मत ही नहीं रहती।

हकीकत यह है कि relapse (वापस पीना) अक्सर तब होता है जब शराब तो हटा दी जाती है, लेकिन वह खाली जगह नहीं भरी जाती जो शराब ने बनाई थी। सोचिए — अगर शराब आपके लिए तनाव से राहत का ज़रिया थी, तो छोड़ने के बाद तनाव तो रहेगा ही। अगर शराब बोरियत मिटाने का तरीका थी, तो बोरियत तो बढ़ेगी ही।

शराब छोड़ने के बाद पहले कुछ हफ्तों में गुस्सा, बेचैनी, नींद न आना, चिड़चिड़ापन, और अकेलापन — ये सब बढ़ जाते हैं। यह withdrawal के लक्षण भी हो सकते हैं और यह उन भावनाओं का उभरना भी हो सकता है जिन्हें शराब दबाकर रखती थी। अगर कोई इंसान इन बातों के लिए पहले से तैयार नहीं है, तो दिमाग अपना पुराना रास्ता ढूँढ लेता है — और वह रास्ता शराब की तरफ जाता है।

Relapse कोई असफलता नहीं है

यह बात समझना बहुत ज़रूरी है कि relapse का मतलब यह नहीं कि आप असफल हो गए। दुनिया भर के addiction experts कहते हैं कि relapse recovery का एक हिस्सा है, न कि उसका अंत। जैसे diabetes में कभी शुगर बढ़ जाती है, वैसे ही addiction में कभी-कभी पुरानी आदत वापस आ सकती है। फर्क यह है कि हर relapse के बाद आप पहले से ज़्यादा जानते हैं — कि कहाँ गलती हुई, कौन सा trigger था, और अगली बार क्या अलग करना है।

शराब छोड़ने के बाद जो कोई नहीं बताता

इंटरनेट पर ज़्यादातर लेख शराब छोड़ने के फायदे बताते हैं — लिवर सुधरेगा, वजन कम होगा, रिश्ते अच्छे होंगे, पैसे बचेंगे। यह सब सच है, लेकिन यह सिक्के का एक पहलू है।

कम ही लोग बताते हैं कि sober (शांत) होने के बाद ज़िंदगी कुछ समय तक और मुश्किल लग सकती है। यह कोई डराने की बात नहीं है — यह तैयार करने की बात है। जब शराब हटती है, तो वह पर्दा भी हट जाता है जो बहुत सारी तकलीफों को ढक रहा था। अचानक वो सारी भावनाएँ, वो पुरानी यादें, वो अधूरी बातें — सब सामने आ जाती हैं।

यह वह दौर होता है जब इंसान को खुद के साथ बैठना पड़ता है — बिना किसी सहारे के, बिना किसी नशे के, बिना भागने के। और यही वह जगह है जहाँ ज़्यादातर लोग टूट जाते हैं। क्योंकि यहाँ कोई shortcut काम नहीं करता। न मोटिवेशन, न कसम, न डर।

लेकिन यही वह जगह भी है जहाँ असली ठीक होना शुरू होता है। जब आप अपनी तकलीफ को बिना भागे महसूस करते हैं, तब पहली बार आप उससे deal करना सीखते हैं।

शराब छोड़ने की शुरुआत कहाँ से होती है?

बहुत से लोग सोचते हैं कि शराब छोड़ना एक तारीख से शुरू होता है — "1 जनवरी से नहीं पीऊँगा" या "इस बार होली से बंद"। लेकिन सच यह है कि छोड़ना तारीख से नहीं, समझ से शुरू होता है

छोड़ना तब शुरू होता है जब इंसान यह मान ले कि वह शराब से नहीं, बल्कि अपने दर्द से भाग रहा है। जब यह बात दिल तक पहुँचती है — सिर्फ दिमाग तक नहीं — तब शराब अपने आप केंद्र में नहीं रहती। तब सवाल बदल जाता है। "शराब कैसे छोड़ें" की जगह सवाल बनता है — "मैं अपने दर्द से कैसे निपटूँ?"

यह समझ एक दिन में नहीं आती। इसमें कोई फिल्मी hero moment नहीं होता जहाँ बैकग्राउंड में म्यूज़िक बजे और ज़िंदगी बदल जाए। यह धीरे-धीरे आती है — छोटे-छोटे पलों में, जब आप अपनी सच्चाई को देखने की हिम्मत करते हैं। लेकिन यही समझ लंबे समय तक टिकती है, क्योंकि यह बाहर से नहीं बल्कि अंदर से आई है।

शराब छोड़ने के लिए व्यावहारिक कदम

ऊपर जो बातें लिखी हैं, वो मानसिक तैयारी की हैं। लेकिन सिर्फ समझ से काम नहीं चलता — कुछ ठोस कदम भी उठाने पड़ते हैं। यहाँ कुछ ऐसे कदम हैं जो असल ज़िंदगी में काम आते हैं:

1. अपने triggers पहचानें: हर इंसान के पीने के पीछे कोई न कोई trigger होता है। किसी के लिए ऑफिस का तनाव है, किसी के लिए दोस्तों का साथ, किसी के लिए रात का अकेलापन। जब तक आप अपने triggers नहीं जानते, तब तक आप अंधेरे में तीर चला रहे हैं। एक-दो हफ्ते डायरी लिखें — कब पीने का मन करता है, क्या हो रहा होता है उस वक्त, कैसा महसूस हो रहा होता है।

2. पहले हफ्ते की तैयारी करें: शराब छोड़ने के पहले 3-7 दिन सबसे कठिन होते हैं। इस दौरान withdrawal symptoms हो सकते हैं — हाथ काँपना, पसीना आना, नींद न आना, बेचैनी। अगर आप लंबे समय से भारी मात्रा में पी रहे हैं, तो डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें। कुछ मामलों में अचानक शराब छोड़ना खतरनाक भी हो सकता है। इस विषय पर पढ़ें: शराब छोड़ते वक्त मौत का डर — क्या यह सच है?

3. खाली समय का इंतज़ाम करें: शराब छोड़ने के बाद सबसे बड़ी दुश्मन बोरियत है। वह समय जो पहले पीने में जाता था, अब खाली लगता है। इस समय को भरने के लिए कोई activity ढूँढें — टहलना, कोई hobby, कुछ पढ़ना, बागवानी, या सिर्फ चाय बनाकर बैठना। ज़रूरी नहीं कि कोई बड़ा काम हो, बस इतना काफी है कि दिमाग occupied रहे।

4. किसी एक इंसान से बात करें: आपको पूरी दुनिया को बताने की ज़रूरत नहीं है। बस एक इंसान — जिस पर भरोसा हो — उसे बताएँ कि आप कोशिश कर रहे हैं। यह कोई दोस्त हो सकता है, कोई रिश्तेदार, कोई counselor। अकेले लड़ना बहादुरी नहीं, बल्कि ज़रूरत से ज़्यादा मुश्किल बनाना है।

5. छोटे goals रखें: "ज़िंदगी भर नहीं पीऊँगा" — यह सोचना भारी लगता है। इसकी जगह सोचें "आज नहीं पीऊँगा"। बस आज। कल की चिंता कल करेंगे। एक-एक दिन करके चलना बहुत कारगर तरीका है।

शराब छुड़ाने के नकली इलाज से बचें

बाज़ार में बहुत सारे लोग हैं जो शराब छुड़ाने के नाम पर पैसे बनाते हैं। कोई बाबा है जो ताबीज़ देता है, कोई "चमत्कारी दवा" बेचता है, कोई WhatsApp पर "guaranteed इलाज" का विज्ञापन भेजता है। इन सबसे सावधान रहें।

शराब की लत एक complex चीज़ है जिसमें शरीर, मन, और सामाजिक परिस्थितियाँ — तीनों शामिल होती हैं। कोई एक गोली या ताबीज़ इसे ठीक नहीं कर सकता। अगर कोई कहे कि "3 दिन में शराब छूट जाएगी", तो समझ लीजिए कि वह झूठ बोल रहा है। इस पूरे खेल को समझने के लिए पढ़ें: शराब छुड़ाने वाले बाबा — Scam Exposed और शराब छुड़ाने की झूठी दवाई का सच

अगर अभी छोड़ने का मन नहीं है

अगर आप यह पूरा लेख पढ़ रहे हैं और मन में यह आ रहा है — "मैं अभी तैयार नहीं हूँ", "मुझमें इतनी हिम्मत नहीं", "शायद बाद में कभी" — तो ठीक है। सच में ठीक है।

झूठी तैयारी से बेहतर है ईमानदार उलझन। कम से कम आप यह तो देख पा रहे हैं कि कहीं कुछ गड़बड़ है। कम से कम आपने इतना तो किया कि सर्च किया, यह लेख खोला, यहाँ तक पढ़ा। यह कोई छोटी बात नहीं है।

कई बार सच को देख लेना ही पहला कदम होता है, भले ही चलना बाद में शुरू हो। और कभी-कभी "अभी नहीं" का मतलब "कभी नहीं" नहीं होता — इसका मतलब बस इतना है कि अभी आप उस जगह पर हैं जहाँ सब कुछ एक साथ handle करना मुश्किल लग रहा है। यह ठीक है।

परिवार और करीबी लोगों के लिए ज़रूरी बातें

अगर आप यह लेख किसी अपने के लिए पढ़ रहे हैं — अपने पति, पिता, भाई या दोस्त के लिए — तो कुछ बातें आपके लिए भी हैं।

सबसे पहले, यह समझें कि आप किसी को ज़बरदस्ती नहीं छुड़ा सकते। जब तक वह इंसान खुद नहीं चाहेगा, कोई इलाज काम नहीं करेगा। हाँ, आप माहौल बना सकते हैं, सहारा दे सकते हैं, लेकिन फैसला उसका होना चाहिए।

दूसरी बात — ताने मत मारें। "तुम कभी नहीं सुधरोगे", "तुम्हारे अंदर कोई इज़्ज़त नहीं बची", "हमें तुमसे कोई उम्मीद नहीं" — ये बातें स्थिति और बिगाड़ती हैं। शर्म और guilt इंसान को बदलने की ताकत नहीं देते, बल्कि और पीने की वजह बन जाते हैं।

तीसरी बात — खुद का भी ख्याल रखें। किसी addicted इंसान के साथ रहना बेहद थकाने वाला होता है। आप भी emotionally और mentally थक रहे हैं। अगर ज़रूरत हो तो आप भी किसी से बात करें — किसी counselor से या support group से। आपकी सेहत भी उतनी ही ज़रूरी है।

शराब छोड़ने में होने वाली आम गलतियाँ

जब लोग शराब छोड़ने की कोशिश करते हैं, तो कुछ गलतियाँ बार-बार होती हैं। इन्हें जानना आपको तैयार रहने में मदद करेगा:

गलती #1: सबकुछ एक साथ बदलने की कोशिश करना। शराब छोड़ना, सिगरेट छोड़ना, gym जाना, healthy खाना — सब एक साथ शुरू करना। यह overload बनता है और जब एक चीज़ गड़बड़ होती है, तो सब गिर जाता है। एक बार में एक ही बदलाव पर focus करें।

गलती #2: अकेले में लड़ना। बहुत से लोग शर्म की वजह से किसी को बताते नहीं। लेकिन अकेलापन addiction का सबसे बड़ा साथी है। कम से कम एक भरोसेमंद इंसान को अपनी कोशिश में शामिल करें।

गलती #3: Relapse को अंत समझना। एक बार वापस पी लिया तो मान लेना "मुझसे नहीं होगा"। Relapse एक setback है, failure नहीं। हर बार आप कुछ नया सीखते हैं।

गलती #4: बिना डॉक्टर की सलाह के अचानक छोड़ना। अगर आप सालों से रोज़ाना भारी मात्रा में पीते हैं, तो अचानक छोड़ना शारीरिक रूप से खतरनाक हो सकता है। Medical supervision ज़रूरी है।

गलती #5: सिर्फ willpower पर भरोसा करना। Willpower एक सीमित resource है। जब थके होंगे, भूखे होंगे, या तनाव में होंगे — willpower कम हो जाएगी। इसलिए system बनाएँ, सिर्फ willpower पर न टिकें।

Vivek Bhai ki Advice

मैंने सालों में बहुत सारे लोगों की कहानियाँ सुनी हैं और इस विषय पर काफी काम किया है। एक बात जो मैंने बार-बार देखी है — जो लोग शराब छोड़ने में सफल होते हैं, वो अक्सर वो लोग नहीं होते जिनमें सबसे ज़्यादा "willpower" होती है। वो वो लोग होते हैं जो अपनी कमज़ोरी को स्वीकार करने की हिम्मत रखते हैं

दूसरी बात — recovery में सबसे ज़्यादा काम "boring" चीज़ें करती हैं। Routine बनाना, रोज़ एक ही समय पर सोना-उठना, खाना सही समय पर खाना, टहलना, डायरी लिखना। कोई इन्हें Instagram पर share नहीं करता, लेकिन recovery की असली ताकत इन्हीं छोटी-छोटी आदतों में है। ग्लैमरस नहीं है, लेकिन काम करता है।

तीसरी बात — किसी भी "instant cure" पर भरोसा मत करो। न कोई बाबा शराब छुड़ा सकता है, न कोई ताबीज़, न कोई WhatsApp वाली दवाई। अगर कोई कहे "guaranteed 3 दिन में", तो भागो वहाँ से। Recovery एक process है, कोई event नहीं।

और आखिरी बात — अगर आज छोड़ नहीं पा रहे, तो खुद को बुरा मत कहो। बुरा कहने से कुछ नहीं बदलता, बल्कि और पीने का बहाना मिल जाता है। अपने आप से इतना कहो — "आज नहीं हुआ, कल फिर कोशिश करूँगा।" बस इतना काफी है।

ज़रूरी बातें एक नज़र में

अगर आपने पूरा लेख पढ़ा तो अच्छी बात है। लेकिन अगर बाद में याद रखने के लिए कुछ ज़रूरी बातें चाहिए, तो ये रहीं:

✓ शराब की लत सिर्फ शरीर की नहीं, मन की है — और मन को ठीक करने में समय लगता है।

✓ कसम और मोटिवेशन अकेले काफी नहीं — समझ और system ज़रूरी है।

✓ Relapse असफलता नहीं, सीखने का मौका है।

✓ शराब छोड़ने के बाद ज़िंदगी पहले मुश्किल लग सकती है — यह normal है।

✓ अकेले मत लड़ें — कम से कम एक भरोसेमंद इंसान को बताएँ।

✓ "Instant cure" बेचने वालों से दूर रहें।

✓ एक-एक दिन करके चलें — बस आज पर focus रखें।

✓ भारी शराब पीने वाले बिना डॉक्टर की सलाह के अचानक न छोड़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

क्या शराब की लत सच में छूट सकती है?

हाँ, लाखों लोगों ने शराब छोड़ी है और एक सामान्य ज़िंदगी जी रहे हैं। लेकिन यह समझना ज़रूरी है कि "छोड़ना" एक बार का फैसला नहीं, बल्कि एक चलती हुई प्रक्रिया है। कुछ लोगों के लिए यह आसान होता है, कुछ के लिए बहुत मुश्किल। लेकिन नामुमकिन किसी के लिए नहीं है।

शराब छोड़ने के कितने दिन बाद शरीर सामान्य होता है?

शारीरिक withdrawal symptoms आमतौर पर 3-7 दिन में peak पर होते हैं और 2-3 हफ्तों में कम होने लगते हैं। लेकिन मानसिक रूप से — नींद, mood, energy level — इन सबको सामान्य होने में कुछ महीने लग सकते हैं। हर इंसान का शरीर अलग है, इसलिए कोई एक fixed timeline नहीं है।

क्या बिना rehab center गए शराब छोड़ी जा सकती है?

हाँ, बहुत से लोग बिना rehab गए शराब छोड़ते हैं। लेकिन यह इस पर निर्भर करता है कि लत कितनी गहरी है। अगर आप सालों से रोज़ भारी मात्रा में पीते हैं, तो medical supervision ज़रूरी है। हल्की से मध्यम लत में, अच्छी समझ, support system, और counseling से बहुत फर्क पड़ सकता है।

शराब छोड़ने के बाद नींद क्यों नहीं आती?

शराब central nervous system को suppress करती है, जिससे एक तरह की नकली नींद आती है। जब शराब बंद होती है, तो nervous system overactive हो जाता है — इसीलिए बेचैनी और नींद न आना आम है। यह कुछ हफ्तों में ठीक होने लगता है। इस दौरान रात की routine बनाना, screen time कम करना, और हल्का टहलना मदद कर सकता है।

अगर relapse हो जाए तो क्या करें?

सबसे पहले — खुद को कोसना बंद करें। Relapse का मतलब यह नहीं कि सब बर्बाद हो गया। रुकें, सोचें कि क्या trigger था, और अगले दिन से फिर शुरू करें। अगर बार-बार relapse हो रहा है, तो किसी professional की मदद लें — इसमें कोई शर्म नहीं है।

क्या शराब छोड़ने के लिए कोई दवाई होती है?

हाँ, कुछ medicines हैं जो डॉक्टर की देखरेख में दी जाती हैं — जैसे Naltrexone, Disulfiram (Antabuse), और Acamprosate। ये craving कम करने और relapse रोकने में मदद कर सकती हैं। लेकिन कभी भी बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवाई न लें। और किसी भी online "miracle drug" पर भरोसा न करें।

परिवार का सहयोग कितना ज़रूरी है?

बहुत ज़रूरी है, लेकिन सही तरीके का सहयोग। ताने मारना, शर्मिंदा करना, या ज़बरदस्ती करना — ये सहयोग नहीं है। असली सहयोग है — धैर्य रखना, बिना judge किए सुनना, और ज़रूरत पड़ने पर professional help दिलाने में मदद करना। परिवार का positive support recovery की संभावना को कई गुना बढ़ा देता है।

आखिरी बात

शराब छोड़ना आसान नहीं है — यह कोई भी ईमानदार इंसान मानेगा। लेकिन यह नामुमकिन भी नहीं है। लाखों लोग इस रास्ते पर चले हैं और बहुत से उन्हीं जगहों से शुरू हुए हैं जहाँ शायद आप अभी हैं — उलझे हुए, थके हुए, और "क्या फायदा" सोचते हुए।

फर्क यह है कि उन्होंने एक और बार कोशिश की। बस एक और बार। और कभी-कभी वही "एक और बार" ज़िंदगी बदल देती है।

अगर आज छोड़ नहीं पा रहे, तो कोई बात नहीं। लेकिन यह लेख save कर लीजिए। जिस दिन मन कहे "अब बहुत हो गया" — उस दिन यह काम आएगा।

Vivek Hardaha - Recovery Writer
Vivek Hardaha
M.Sc (CS), MA Sociology
Alcohol Recovery Experience Since 2018
Comments
Anonymous January 21, 2026
Good 👍
Anonymous January 21, 2026
jdjd