हर कुछ महीनों में खबर आती है — "ज़हरीली शराब से 50 लोगों की मौत", "कच्ची दारू पीकर गांव के 20 लोग अंधे हुए।" यह खबरें पढ़कर लोग दो मिनट अफसोस करते हैं और भूल जाते हैं। लेकिन जिनके घर में यह त्रासदी आती है, उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल जाती है।
कच्ची दारू भारत के गांवों और छोटे कस्बों में एक भयानक सच्चाई है। गरीबी, लत, और सस्ते नशे की तलाश में लाखों लोग हर रोज ऐसी शराब पीते हैं जिसकी कोई quality check नहीं होती, कोई guarantee नहीं होती, और जिसमें कब ज़हर मिला हो कोई नहीं जानता। आज इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि कच्ची दारू असल में क्या होती है, यह कैसे बनती है, इसमें Methanol कैसे आता है, और यह क्यों इतनी जानलेवा है।
कच्ची दारू और ब्रांडेड शराब में क्या फर्क है
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि हर शराब एक जैसी नहीं होती। ब्रांडेड शराब factory में बनती है जहां Fermentation और Distillation की पूरी process scientifically controlled होती है। Temperature, timing, और ingredients सब measured होते हैं। बनने के बाद हर batch की testing होती है ताकि यह ensure किया जा सके कि उसमें harmful chemicals नहीं हैं।
कच्ची दारू इसका बिल्कुल उल्टा है। यह गांवों में खुले में या झोपड़ियों में बनाई जाती है। बनाने वाले के पास न कोई training होती है, न equipment, न quality control। जो भी सामग्री मिल जाए — महुआ के फूल, गुड़, सड़े फल, या अनाज — उसे बड़े बर्तनों में डालकर सड़ाया जाता है और फिर उबालकर भाप इकट्ठा की जाती है। इस पूरी process में कोई standard नहीं होता।
ब्रांडेड शराब में जो Alcohol होता है वह Ethanol है जो controlled मात्रा में शरीर handle कर सकता है। लेकिन कच्ची दारू में Ethanol के साथ Methanol भी बन जाता है जो एक deadly ज़हर है। यही वह chemical है जो लोगों को मारता है और अंधा बनाता है।
कच्ची दारू कैसे बनती है — खतरनाक प्रक्रिया
कच्ची दारू बनाने की process को समझना जरूरी है ताकि आप जान सकें कि इसमें खतरा कहां छुपा है। पहला step है Fermentation — महुआ के फूल, गुड़, या सड़े फल को पानी में डालकर कई दिन तक सड़ने दिया जाता है। इस process में yeast sugar को Alcohol में बदलता है। यहां तक तो ठीक है।
लेकिन problem Distillation में आती है। Fermented liquid को बड़े मिट्टी के बर्तनों में उबाला जाता है। भाप को जंग लगे पाइपों से गुज़ारकर ठंडा किया जाता है और बूंद-बूंद करके शराब इकट्ठा होती है। यहां सबसे बड़ा खतरा यह है कि Ethanol और Methanol दोनों का boiling point अलग-अलग होता है। Methanol पहले उबलता है (64.7°C) और Ethanol बाद में (78.4°C)।
Professional distilleries में पहली भाप को अलग कर दिया जाता है क्योंकि उसमें Methanol होता है। लेकिन कच्ची दारू बनाने वालों को इसकी जानकारी नहीं होती या वो जानबूझकर सारी भाप मिला देते हैं ताकि ज्यादा मात्रा में शराब बने। नतीजा — कच्ची दारू में Methanol की मात्रा खतरनाक level तक पहुंच जाती है।
मिलावट का खेल — यूरिया से लेकर बैटरी एसिड तक
कच्ची दारू में Methanol का खतरा तो है ही, लेकिन उससे भी बड़ा खतरा मिलावट का है। भठ्ठी चलाने वाले लोग ज्यादा मुनाफे के लिए और नशा बढ़ाने के लिए भयानक चीजें मिलाते हैं।
यूरिया (Urea) मिलाना common practice है — इससे नशा तेज लगता है लेकिन यह kidney को बर्बाद कर देता है। ऑक्सीटोसिन injection मिलाते हैं जो normally जानवरों में दूध बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होता है। कीटनाशक (Pesticide) मिलाते हैं ताकि शराब "कड़क" लगे। कुछ cases में तो बैटरी का तेज़ाब (Sulphuric Acid) तक मिलाया गया है।
अब सोचिए — आप 20 रुपए का एक गिलास पी रहे हैं और उसमें यूरिया, कीटनाशक, और बैटरी एसिड मिला हो सकता है। आपको पता भी नहीं चलेगा क्योंकि शराब का तेज़ स्वाद इन सबको छुपा देता है। जब तक पता चलता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
Methanol Poisoning — मौत और अंधेपन का असली कारण
कच्ची दारू से होने वाली ज्यादातर मौतों का कारण Methanol Poisoning है। यह समझना जरूरी है कि Methanol शरीर में जाकर क्या करता है।
जब Methanol शरीर में जाता है, तो लीवर इसे तोड़ने की कोशिश करता है — बिल्कुल वैसे जैसे वह Ethanol तोड़ता है। लेकिन Methanol टूटकर Formaldehyde बनता है और फिर Formic Acid बनता है। Formic Acid एक बेहद खतरनाक ज़हर है जो शरीर की कोशिकाओं को मारना शुरू कर देता है।
सबसे पहले Optic Nerve (आंखों की नस) damage होती है। इसलिए Methanol Poisoning के पहले लक्षणों में धुंधला दिखना और आंखों में दर्द शामिल है। कई मामलों में लोग पूरी तरह अंधे हो जाते हैं और यह अंधापन permanent होता है।
इसके बाद Formic Acid खून को acidic बना देता है जिसे Metabolic Acidosis कहते हैं। इससे शरीर के सभी organs fail होने लगते हैं — kidney बंद हो जाती है, सांस लेने में दिक्कत होती है, और brain damage होता है। अगर समय पर इलाज न मिले तो मौत हो जाती है। सिर्फ 10ml Methanol अंधा बना सकता है और 30ml जान ले सकती है।
कच्ची दारू पीने वालों के शरीर पर लंबे समय का असर
जो लोग regular कच्ची दारू पीते हैं, उनके शरीर पर शराब का असर normal शराबियों से कई गुना ज्यादा होता है। लीवर सबसे पहले damage होता है। ब्रांडेड शराब पीने वालों में Cirrhosis 15-20 साल में होता है, कच्ची दारू पीने वालों में यह 5-7 साल में ही हो सकता है क्योंकि chemical contamination लीवर को extra damage करता है।
Kidney damage भी बहुत common है। यूरिया और दूसरे chemicals kidney पर भारी बोझ डालते हैं। Nervous system damage होता है जिससे हाथ-पैर सुन्न पड़ जाते हैं, चलने में दिक्कत होती है, और याददाश्त कमजोर हो जाती है। दिमाग पर शराब का असर कच्ची दारू में और भी गंभीर होता है।
सबसे दुखद बात यह है कि कच्ची दारू पीने वाले ज्यादातर गरीब तबके के लोग होते हैं जिनके पास इलाज के पैसे नहीं होते। शराब का आर्थिक नुकसान उन्हें और गरीबी में धकेल देता है।
कच्ची दारू की लत क्यों ज्यादा खतरनाक है
कच्ची दारू सस्ती होती है — 10-20 रुपए में एक गिलास मिल जाता है। इसलिए गरीब लोग इसे आसानी से afford कर लेते हैं। सस्ती और आसानी से मिलने की वजह से लत लगना बहुत जल्दी होता है।
कच्ची दारू में chemicals की वजह से नशा भी ज्यादा तेज और तीखा होता है। दिमाग का Dopamine system इस तेज नशे का आदी हो जाता है। फिर ब्रांडेड शराब पीने पर उतना नशा नहीं लगता और इंसान वापस कच्ची दारू पर आ जाता है।
जो लोग कच्ची दारू की लत में हैं, उनके लिए शराब छोड़ना और भी मुश्किल होता है क्योंकि withdrawal symptoms गंभीर होते हैं। ऐसे में medical supervision में शराब छोड़ना जरूरी है।
कच्ची दारू पीने के बाद तबीयत बिगड़े तो तुरंत क्या करें
अगर किसी ने कच्ची दारू पी है और उसे धुंधला दिखने लगे, तेज सिरदर्द हो, उल्टी रुक नहीं रही हो, सांस लेने में दिक्कत हो, या बेहोशी आ रही हो — तो यह Methanol Poisoning के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे में एक मिनट भी देर मत करें और तुरंत हॉस्पिटल ले जाएं।
Methanol Poisoning का इलाज समय पर मिलना बेहद जरूरी है। हॉस्पिटल में Ethanol drip या Fomepizole दवा दी जाती है जो लीवर को Methanol तोड़ने से रोकती है। इसके साथ dialysis करके खून से Methanol और Formic Acid बाहर निकाला जाता है। जितनी जल्दी इलाज मिले, जान बचने की उतनी ज्यादा संभावना।
बाबाओं या हकीमों के पास ले जाने की गलती बिल्कुल न करें। Methanol Poisoning में हर मिनट कीमती है और झाड़-फूंक से कोई ज़हर नहीं निकलता। झूठी दवाइयां देने से स्थिति और खराब हो सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q1: क्या कच्ची दारू और देसी शराब एक ही चीज है?
नहीं। सरकारी ठेके पर मिलने वाली देसी शराब licensed होती है और उसकी testing होती है। कच्ची दारू अवैध रूप से घरों या भठ्ठियों में बनाई जाती है जिसकी कोई quality check नहीं होती। दोनों में बहुत बड़ा फर्क है।
Q2: कच्ची दारू से मौत क्यों होती है लेकिन ब्रांडेड शराब से नहीं?
ब्रांडेड शराब में सिर्फ Ethanol होता है जो controlled मात्रा में होता है। कच्ची दारू में Methanol और दूसरे ज़हरीले chemicals मिले होते हैं। Methanol शरीर में Formic Acid बनाता है जो organs fail करता है और मौत का कारण बनता है।
Q3: Methanol Poisoning के पहले लक्षण क्या हैं?
सबसे पहले धुंधला दिखना, आंखों में दर्द, तेज सिरदर्द, चक्कर, उल्टी, और पेट दर्द होता है। यह लक्षण शराब पीने के 12-24 घंटे बाद दिखते हैं। अगर ये लक्षण दिखें तो तुरंत हॉस्पिटल जाएं।
Q4: कच्ची दारू बनाना और बेचना कितनी बड़ी सजा है?
भारत में अवैध शराब बनाना और बेचना IPC की धारा 272 और 328 के तहत अपराध है। अगर इससे किसी की मौत होती है तो धारा 304 (Culpable Homicide) तक लग सकती है जिसमें 10 साल तक की सजा हो सकती है।
Q5: क्या कच्ची दारू को उबालने से Methanol निकल जाता है?
नहीं। एक बार Methanol शराब में मिल गया तो घर पर उसे अलग करना संभव नहीं है। उबालने से Ethanol भी उड़ जाएगा और Methanol पूरा नहीं निकलेगा। कच्ची दारू को safe बनाने का कोई घरेलू तरीका नहीं है।
Q6: अगर कोई regular कच्ची दारू पीता है तो उसे कैसे रोकें?
कच्ची दारू की लत regular शराब से भी ज्यादा खतरनाक है। कसम दिलाने से काम नहीं चलेगा। डॉक्टर से मिलें और नशा मुक्ति केंद्र से संपर्क करें। जितनी जल्दी इलाज शुरू हो उतना बेहतर।
Vivek Bhai ki Advice
भाई, कच्ची दारू पीना नशा नहीं है — यह Russian Roulette खेलना है। हर गिलास के साथ आप अपनी जान दांव पर लगा रहे हो। आज नहीं तो कल, वह एक गिलास आएगा जिसमें Methanol की मात्रा ज्यादा होगी और फिर या तो अंधापन या मौत।
20 रुपए का वह गिलास आपके बच्चों से उनका बाप छीन सकता है, आपकी पत्नी को विधवा बना सकता है। जो पैसा कच्ची दारू पर खर्च होता है, वही पैसा बच्चों की पढ़ाई में लगाओ। और अगर लत लग चुकी है तो शर्म छोड़ो और मदद लो। शराब छोड़ने के बाद जिंदगी बहुत खूबसूरत है — बस एक कदम उठाने की देर है।
Team ASAR.blog — Addiction Recovery Expert
